निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और प्रश्न का उत्तर दीजिए:
पीठ के दर्द और चोट में एक व्यक्ति से दूसरे में भिन्नता हो सकती है। हालांकी पीठ के दर्द से पूर्णतया छुटकाए पाना संभव नहीं होता फिर भी कार्य-संबंधित पीठ के दर्द को कम करने में अनेक पद्धतियाँ सहायक हैं । दोहराव अर्थात किसी निश्चित क्रिया को बार-बार करने से जनित पुनरावृत्तिक चोट, मांसपेशीय थकान की ओर ले जाती है । विभिन्न दोषपूर्ण मुद्रा जैसे श्रानत (स्लाउचिंग) आपके पीठ के प्राकृतिक वक्रता को बढा देती है जिसके कारण मांसपेशीय थकान और चोट भी हो सकती है । हमें धूम्रपान से बचना चाहिए क्योंकि धुँआ और निकोटिन, दोनों के कारण मेरूदण्ड में समान्य की अपेक्षा जरन (एज) तीव्र हो सकता है । ओएसएचए, 2015 के अनुसार, कर्मचारी के शरीर के अनुसार डेस्क को समायोजित करने या आलमारी की ऊँचाई को समायोजित करने जैसे प्रयोगों के माध्यम से अथवा जोखिमपूर्ण गतियों को समाप्त करने से मेरुदण्ड के जरण को बचाना संभव हो सकेगा । अगले अभियांत्रित की नियंत्रण कदम वजन कम करना पहुँचा गतिसीमा (रेंज ऑफ मोशन) को कम करना और किए जाने वाले क्रिया-कलापों के नियंत्रण में लेना होते हैं। कार्य को कम श्रम-साध्य बनाने और उसमें प्रयत्न को कम करने के लिए भारी सामान को खींचने की अपेक्षा धक्का देने को सदैव प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जब हम उपकरण एवं सामानों का भण्डारण कर रहे होते है, तब हम यह ध्यान रखें कि उन्हें कमर के स्तर पर भंडारित करें जिससे उन्हें भूमि पर या घुटनों के स्तर से अथवा कंधो के ऊँचाई के स्तर से उठाने पर लगनेवाले आयास बल से बचा जा सके । ओएसएचए तीन स्तरों पर कार्य करने का सुझाव देता है, प्रथम श्रमिक के शरीर नियंत्रण उपाय स्तर पर, द्वितिय अभियांत्रिकी नियंत्रण और तृतीय, प्रशासनिक नियंत्रण जैसे कर्मचारियों का आवर्तन करना, भारि सामान को दो व्यक्तियों द्वारा उठाना और कार्य- समय की अवधि में उन्हें अंतराल देना ।