Comprehension Passage

निम्नांकित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए। 

बालक का जन्म माता - पिता और कुटुम्ब के लिए सदैव अति प्रसन्नता का कारण होता है। बालक आकर्षण का मुख्य केन्द्र होता है। बालक पर ध्यान दिया जाता है और बहुत ध्यान से उसका पोषण किया जाता है। जब बालक बड़ा होता है यह अपना भूमिका निर्वाह करने लगता है और दायित्व निभाता है। यह अधिगम करने लगता है, समकक्ष बालकों के साथ संवाद करने लगता है और गेम्स खेलने लगता है। शीघ्र ही बालक स्कूली शिक्षा और कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर लेता है और 22 वर्ष की आयु में वह अच्छी तनख्वाह (उत्तम वेतनयुक्त) वाली नौकरी पाने की अवस्था में आ जाता है। पूरे क्रम में, उसे अपनी क्षमता का इष्टतम उपयोग करने में सक्षम होने के लिए उनका भली भाँति लालन पालन पोषण किए जाने के साथ - साथ क्षमताएँ विकसित करने का पर्याप्त अवसर दिया जाता है।

अब हम दिव्यांग बालक के जन्म के बारे में विचार करें। निःशक्त बालक के जन्म के फलस्वरूप अवसाद, नैराश्य और क्रोध उत्पन्न होता है। ऐसे बालक के आरंभिक वर्ष उपेक्षा अथवा अति - संरक्षणात्मक माहौल (वातावरण) में व्यतीत होते हैं। सभी परिस्थितियों में बालक को वात्सल्य के अवसर से वंचित रहना पड़ता है। यहाँ तक कि उसके सामान्य विकास में भी सामान्य कालावधि से अधिक समय लगता है। ऐसे बालक को सामान्य विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने से वंचित रहना पड़ता है और उसे या तो विशेष विद्यालय में भेजा जाता है या घर पर ही रखा जाता है। बाल्यावस्था में सामान्य बाल्यकाल में मुख्यधारा के अवसरों, सामान्य स्कूली शिक्षा से अपवर्जित होने के बाद उस बालक से यह अपेक्षा रखना सर्वधा अनुचित है कि उसे सामान्य जगत में अकस्मात् सुदृढ़ स्थान प्राप्त हो जाए। उसका अपवर्जन जो प्रायः जन्म के बाद ही आरंभ हो जाता है जिसके परिणाम स्वरूप उसकी दिव्यांगता विकलांगता में परिवर्तित (रूपांतरित) हो जाती है और उसे सामाजिक बोझ समझा जाता है। अपवर्जन में दिव्यांग व्यक्ति को अधिगम करने तथा कुटुम्ब और सामुदायिक जीवन की गतिकी को आत्मसात करने के अवसर से वंचित किया जाता है। समावेशन की प्रक्रिया बालक के जन्म की घड़ी से ही आरंभ किए जाने की आवश्यकता है क्योंकि अधिगम, विकास और उद्विकास की प्रक्रिया जन्म के समय आरंभ होती है और इस प्रक्रम को उपेक्षा से बचाया जाना चाहिए। एकांतीकरण अथवा अपवर्जन सहज (स्वाभाविक) नहीं है। इसकी प्रवृत्ति विकास को अवरूद्ध करने और अमुमन विमंदित करने की होती है समावेशन तब संभव हो पाता है जब समुदाय इसे यथार्थस्वरूप देने के लिए अपने स्वयं के संसाधन विकसित करता है।

दिव्यांग बच्चों में निम्नांकित में से किसके परिणाम स्वरूप वृद्धि अवरूद्ध होती है और अक्सर विमंदित होती है?

1
समावेशन
2
कुटुम्ब
3
एकांतता
4
समुदाय

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