नीचे दिए गए अनुच्छेद को पढ़िए और अपनी समझ के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए:
दूरसंचार (शाब्दिक अभिप्राय : दूरस्थ संचार) मानव समाज के लिए सदैव महत्त्वपूर्ण रहा है। प्राचीन काल में भी सरकारें तथा सैन्य इकाइयाँ सूचना एकत्र करने तथा आदेश जारी करने की दूरसंचार व्यवस्था पर बहुत निर्भर रहती थीं। दूर-संचार का पहला प्रकार पैदल अथवा घोड़े पर सवार संदेशवाहक होते थे, परंतु काफी दूर स्थित व्यक्तियों को संक्षिप्त संवाद (यथा शहर को आसन्न छापामारों की कोई चेतावनी देना) भेजने के लिए आग अथवा धुएँ के संकेत दिए जाते थे। सूर्य के प्रकाश (सूर्यचित्र विद्या) के परावर्तन हेतु संकेत दर्पणों का उपयोग दूरसंचार का दूसरा प्रभावी तरीका था। ऐसी पहली घटना प्राचीन यूनान में दर्ज की गई थी। मार्को पोलो ने सुदूर पूर्व की अपनी यात्रा में भी संकेत दर्पणों का उल्लेख किया है। यह प्राचीन दृश्य संचार प्रौद्योगिकी आश्चर्यजनक रूप से डिजिटल हैं। विभिन्न संविन्यासों में आग और धुएँ के भिन्न-भिन्न कूट-शब्द हैं। यूनानी शहरों की निकटवर्ती पहाड़ियों अथवा पर्वतों पर ऐसी संचार व्यवस्था के लिए विशेष कर्मी होते थे जो पुनर्योजी आवर्तक (रिपीटर) की श्रृंखला का निर्माण करते थे। वस्तुतः आग और धुएँ के संकेत के मंच आज भी चीन की बड़ी दीवार पर अंकित हैं। एक और दिलचस्प बात यह है कि परावर्तक अथवा लेंस जो हमारे द्वारा आज प्रयुक्त किये जा रहे हैं प्रवर्धक एवं श्रृंगिका (ऐन्टिना) के समतुल्य हैं, का उपयोग आगे के दिशापरक मार्ग निर्देशक के लिए किया जाता था।
यह स्वाभाविक है, कि इन प्राचीन दृश्य संचार व्यवस्थाओं की स्थापना एक दुष्कर कार्य था तथा इनसे एक घंटे में थोड़ी बहुत ही सूचना भेजी जा सकती थी। केवल दो सदी पूर्व तीव्रतर दृश्य संचार व्यवस्था विकसित हुई है। वर्ष 1793 में फ्रांस के क्लाउड चेप्पे ने 'संकेत पद्धति टेलीग्राफ' पर अनेक प्रयोगों का आविष्कार किया और प्रयोग भी किये। उनकी संचार व्यवस्था संकेत पद्धति नामक संकेत युक्तियों की श्रृंखला थी जिन्हें विशिष्ट रूप से 10-10 कि. मी. दूरी पर निर्मित टावरों पर खड़ा किया गया था। (एक संकेत पद्धति (सेमाफोर) उस विशाल मानव की तरह दिखाई देता था जिसके दोनों हाथों में संकेत ध्वज होते थे।) ग्राही संकेत पद्धति (सेमाफोर) प्रचालक, बहुधा किसी दूरबीन से, दृश्य रूप में संदेश का लिप्यंतर करता था और उसे प्रत्येक अगले टावर से संदेश को रिले करने का सिलसिला जारी रखता था। यह दृश्य टेलीग्राफ फ्रांस में सरकारी संचार व्यवस्था बन गई तथा यह संयुक्त राज्य अमेरिका सहित अन्य देशों तक भी पहुँची। संकेत-पद्धति (सेमाफोर) अन्ततः विद्युत टेलीग्राफी के समक्ष निस्तेज हो गयी। आजकल 'टेलीग्राफ हिल' नाम के कुछेक अवशिष्ट गलियाँ तथा चिह्नित स्थान हमें इतिहास में उस व्यवस्था के अपने महत्त्व की याद दिलाते हैं। आज बीसवीं सदी में भी दृश्य संचार (एल्डिस लैम्प, पोत ध्वज तथा सूर्यचित्र द्वारा) समुद्री संचार का एक महत्त्वपूर्ण अंग है।