निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए व पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
भारतीय इतिहास में मध्यकालीन युग के दौरान अकादमिक पुस्तकालयों का अस्तित्व ज्ञात नहीं है यद्यपि मुस्लिम शासकों ने अपने-अपने स्थानों पर पुस्तकालयों को संरक्षण दिया था। तथापि बीदर के एक महाविद्यालय से संबद्ध पुस्तकालय, जिसमें भिन्न भिन्न विषयों पर 3000 पुस्तकों का संग्रह था, एकमात्र अपवाद था। औरंगजेब ने अपने महल के पुस्तकालय में इसका विलय करने के लिए इस पुस्तकालय को दिल्ली स्थानांतरित करा लिया था। महाविद्यालयी पुस्तकालय आधुनिक विश्वविद्यालय पुस्तकालयों के अग्रदूत हैं। गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स (1774-85) ने 1781 में कलकत्ता में एक मदरसा स्थापित किया। जोनाथन डंकन ने 1792 में प्राचीन मूल्यवान सामान्य अधिगम व परंपरा की पुस्तकें एकत्र करने की आवश्यकता पर बल दिया। लार्ड मिंटो, गवर्नर जनरल (1807-13) ने अपने 6 मार्च 1811 के कार्यवृत्त में लिखा, प्रत्येक महाविद्यालय के साथ एक पुस्तकालय संबद्ध किया जाए जिसका प्रभार किसी प्रबुद्ध देशज नव्यक्ति के पास हो और पाण्डुलिपियों के रखरखाव के लिए सेवकों का एक लघु अधिष्ठान हो। भारत में अकादमिक तंत्र में पुस्तकालयों के संबंध में संभवतया यह प्रथम लिखित विवरण है। लार्ड आकलैंड, गवर्नर जनरल (1836-40) ने अपने 24 नवंबर 1839 के कार्यवृत्त में पुस्तकालय नीति की ओर आर्ग रूपरेखा बनाई, हमारे अनेक संस्थानों से अब संबद्ध महाविद्यालय पुस्तकालयों का अधिकतम प्रयोग किया जाए। इस प्रकार महाविद्यालयों के पुस्तकालय संग्रहों की संवृद्धि आरम्भ हुई और 1882 तक उनमें से कुछ ने हजार का आंकड़ा पार कर लिया।