निम्नांकित गद्यांश को पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
लोग ऐसा समझ सकते हैं कि और अधिक एवं निर्बाध सूचना प्रवाह से लोगों को संचार की समस्याओं से निजात पाने में मदद मिलेगी किन्तु निर्बाध प्रवाह के परिणामस्वरूप अतिरेक (बहुल) सूचना प्राप्त हो सकती है। लोग विविध तरीके से सूचना अतिभरण का प्रत्युत्तर देते हैं। प्रथमतः वे कतिपय जानकारी (सूचना) की उपेक्षा कर सकते हैं। वह व्यक्ति जिसके पास बहुत अधिक मेल भेजे जाते हैं, वह उन पत्रों की उपेक्षा कर सकता है, जिसका उत्तर दिया जाना चाहिए। द्वितीयतः बहुत अधिक सूचना प्राप्त होने से लोग इसके प्रसंस्करण में त्रुटियां कर सकते हैं। उदाहरणार्थ, वे संदेश में 'नहीं' शब्द छोड़ सकते हैं जिससे आशयित अभिप्राय विपर्यित हो सकता है। तीसरी बात यह है कि लोग सूचना के प्रक्रमण में विलंब कर सकते हैं या तो स्थायी रूप से इसे छोड़ सकते हैं या भविष्य पर टाल सकते हैं। चौथी बात यह है कि वे सूचना का निस्यंदन कर सकते हैं। निस्यंदन उस स्थिति में सहायक हो सकता है जब अत्यधिक अनिवार्य और अति - महत्वपूर्ण सूचना का प्रक्रमण पहले होता है और अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण सूचना को न्यून प्राथमिकता दी जाती है। तथापि, इस बात की भी संभावना है कि प्रथमतः छैन विषयों पर ध्यान दिया जाएगा जिसको आसानी से हैण्डल किया जाये, जबकि अपेक्षाकृत अधिक कठिन, किन्तु संभवतः महत्वपूर्ण संदेश की उपेक्षा की जा सकती है। अंततः लोग संचार कार्य से केवल पलायन कर सूचना के प्रति अपनी अनुक्रिया देते हैं। दूसरे शब्दों में, वे या तो सूचना की उपेक्षा करते हैं या उसका संचार नहीं करते हैं।
"सूचना अतिभार के कुछ प्रत्युत्तर अनुकूल युक्तियाँ हो सकती है जो यदा - कदा प्रकार्यात्मक हो सकते हैं। उदाहरणार्थ, मात्रा घटने तक सूचना के प्रसंस्करण में देरी करना प्रभावी हो सकता है। अतिभार की समस्या से निपटने का एक उपागम सूचना की माँग को कम करना हो सकता है। किसी उद्यम के भीतर, इस लक्ष्य को इस बात पर बल देकर प्राप्त किया जा सकता है कि केवल अनिवार्य डेटा यथा योजनाओं से महत्वपूर्ण विचलन (विपथन) को दर्शानेवाली सूचना का प्रसंस्करण किया जाए। सूचना की बाह्य माँग को घटान सामान्यतया अधिक दुष्कर हो सकता है क्योंकि यह प्रबंधकों इनका नियंत्रण करने में अधिक सक्षम नहीं होते हैं।