Comprehension Passage

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

हाल में घनश्याम शाह (1990) ने भारत के सामाजिक आंदोलनों पर एक बहुत महत्वपूर्ण और सुप्रलेखित साहित्य समीक्षा प्रकाशित की है जिसमें अन्य आयामों के अतिरिक्त, जनजातीय आंदोलनों के विभिन्न प्ररूप वैज्ञानिक वर्गीकरण का विवेचन किया गया है। एल. के. महापात्रा (1972) सामाजिक आंदोलनों से जनजातीय आंदोलनों हेतु व्यापक रूप से प्ररूप विज्ञान का अनुप्रयोग करते हैं। वह (1) प्रतिक्रियावादी (2) रूढ़िवादी और (3) क्रांतिकारी आंदोलन के रूप में इनका वर्णन करते हैं। प्रतिक्रियावादी आंदोलन 'अच्छे पुराने दिनों' को वापस लाने हेतु आंदोलन प्रारंभ करने के प्रयास करते हैं, जबकि रूढ़िवादी / संरक्षणवादी आंदोलन 'यथा स्थिति' बनाए रखने हेतु प्रयास करते हैं। संशोधनवादी या क्रांतिकारी आंदोलन वे हैं जो 'बुराई / पाप' या निम्न रीतिरिवाजों, विश्वासों या संस्थाओं का विनाश करके सांस्कृति या सामाजिक व्यवस्था में 'सुधार' या 'परिष्करण' के लिए आयोजित किए जाते हैं। सुरजीत सिन्हा (1968) आंदोलनों को (1) जातीय विद्रोह (2) सुधार आंदोलन (3) भारतीय संघ के अंतर्गत राजनीतिक स्वायत्तता (4) अलगाववादी आंदोलन और (5) कृषि असंतोष के रूप में वर्गीकृत करते हैं। के.एस. सिंह (1983) सुधार के बदले संस्कृतिकरण और जातीय आंदोलनों की जगह सांस्कृतिक आंदोलन शब्दों के प्रयोग के साथ कमोबेश वही वर्गीकरण करते हैं। संक्षिप्त रूप में घनश्याम शाह (वही) ने प्ररूप वैज्ञानिक वर्गीकरण को इस प्रकार से प्रतिपादित किया है : (1) जातीय आंदोलन (2) कृषि आंदोलन और (3) राजनीतिक आंदोलन। ये सभी तीनों प्रकार केवल परस्परव्याप्त ही नहीं हैं बल्कि वे स्वत: संबंधित और एक दूसरे की ओर अग्रसर भी हैं।

निम्नलिखित में कौन-सा सुरजीत सिन्हा के आंदोलनों के वर्गीकरण का भाग नहीं है?

1
सुधार आंदोलन
2
अलगाववादी आंदोलन
3
नृजातीय विद्रोह
4
प्रतिक्रियावादी आंदोलन

Sponsored

hivanix.in

Visit

This quiz is brought to you by hivanix.in

🌐 Web App Development

Quick Navigation