निम्नांकित गद्यांश को पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
वर्तमान अध्ययन में हम केवल अधिकार के संबंधों से ही चिंतित हैं, क्योंकि ये ही सामाजिक संरचना का हिस्सा हैं और इसलिए समग्र समाजों और उनके भीतर संघों के संगठन से समूह संघर्षों की व्यवस्थित व्युत्पत्ति की अनुमति देते हैं। इस तरह के समूह संघर्ष की सार्थकता इस तथ्य में निहित है कि ये संरचनात्मक रूप से शक्ति के अप्रत्याशित संबंध के उत्पाद नहीं हैं बल्कि जहाँ कहीं भी प्राधिकार का प्रयोग किया जाता है वहाँ यह उत्पन्न होकर उदभाषित होता है और उसका तात्पर्य है कि सभी ऐतिहासिक दशाओं में सभी समाजों में प्राधिकार का प्रयोग किए जाने पर यह प्रोदभूत होता है। (1) प्राधिकार-संबंध सदैव उच्च और अधीनस्थ के बीच का संबंध होता है। (2) जहाँ प्राधिकार-संबंध होता है वहाँ अधीनस्थता सामाजिक रूप से आदेश, चेतावनी और प्रतिषेध, अधीनस्थ तत्त्वों के व्यवहार के नियंत्रण की प्रत्याशा रहती है। (3) इस तरह की प्रत्याशा व्यक्तियों के आचरण से संसक्त होने की बजाय उपेक्षाकृत स्थायी सामाजिक पद-प्रतिष्ठा (स्थिति) से जुड़ी होती है। (4) इस तथ्य के आधार पर वे सदैव नियंत्रण के अध्यधीन व्यक्तियों और उन क्षेत्रों के भीतर जिनके भीतर नियंत्रण अनुमत्य है विनिर्देशन में अन्तर्ग्रस्त रहते हैं। प्राधिकार शक्ति से भिन्न होने के कारण कदापि अन्य व्यक्तियों पर सामान्यीकृत नियंत्रण नहीं है। (5) अधिकार एक वैध संबंध होने के कारण, आधिकारिक आदेशों का पालन न करने को मंजूरी दी जा सकती है; वैध अधिकार के प्रभावी प्रयोग का समर्थन करना वास्तव में कानूनी प्रणाली (और निश्चित रूप से अर्ध-कानूनी रीति-रिवाजों और मानदंडों) के कार्यों में से एक है।