निम्नांकित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
वर्ष 1947 में भारत की स्वतंत्रता के समय भारत को अल्पविकसित अथवा अधिक से अधिक विकासशील अर्थव्यवस्था माना जाता था। देश का केवल सकल घरेलू उत्पाद और प्रति व्यक्ति आय ही कम नहीं थी अपितु विकास के विभिन्न स्तरों में अन्तः प्रादेशिक और अन्तः खण्डीय अंतर भी थे। औद्योगीकरण का स्तर न्यून था और अर्थव्यवस्था द्वितीय विश्वयुद्ध के नकारात्मक प्रभावों से उबर नहीं पाई थी। देश के विभाजन का भी अपना दुष्प्रभाव पड़ा था और देश को शरणार्थियों की बड़ी संख्या की समस्या सहित विविध समस्याओं से जूझना पड़ा था । राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को विश्व युद्ध के परिणामस्वरूप हुए विध्वंश और बंटवारे के साथ-साथ औपनिवेशिक शासकों द्वारा अर्थव्यवस्था के दोहन के बाद देश के लाखों लोगों की आवश्यकता की पूर्ति हेतु पुनर्निर्मित तथा पुनः विन्यसित करने की आवश्यकता थी। देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने (पुनरुज्जीवित्त करने) के लिए बड़े योजनाबद्ध एवं समन्वित निवेश करने की आवश्यकता थी। इसी पृष्ठभूमि में विकास और आर्थिक आयोजना के एक वृहद् व व्यापक कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। भारत में योजना निर्माण की संकल्पना सामाजिक न्याय सहित आर्थिक संवृद्धि की युक्ति के रूप में उद्भूत हुई। इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु, भारत सरकार ने वर्ष 1950 में योजना आयोग की स्थापना की जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री को बनाया गया (योजना आयोग की स्थापना संवैधानिकेत्तर निकाय के रूप में की गई)। आयोग को देश के विकास के लिए उद्देश्य और कार्यनीतियों की रूप रेखा तैयार करने का कार्य सौंपा गया। तदनुसार, आयोग ने देश की आवश्यकता और साधनों का ध्यान रखते हुए पंचवर्षीय योजनाओं की प्रणाली का सुझाव दिया । प्रथम पंचवर्षीय योजना का शुभारंभ वर्ष 1951 में हुआ ।