निम्नलिखित गद्यांश को सावधानीपूर्वक पढिए:
मानव विज्ञान के क्षेत्र में अंतः विषयी शोध दो भिन्न परन्तु अंतःसंबंधित आवश्यकताओं का परिणाम हो सकता है। प्रथम है 'सूचना की आवश्यकता' और अधिक आंकडें, और दूसरा है अधिक सामूहिक संरचनाओं अथवा विश्लेषणात्मक समाकलन की आवश्यकता। पहले स्तर पर अंतः विषयी सहकार में या तो बहुत थोडी समस्या होती है या कोई समस्या नहीं होती है। इसमें इस विश्वास के साथ संबंधित विषयों में सूचना विनिमय अंतर्ग्रस्त होती है कि यह विनिमय अध्यधीन परिघटना के बारे में उस विषय की समझदारी को समृद्ध बनाता है। सूचना अथवा आंकडों के स्तर पर अंतः विषयी संपर्कों द्वारा व्याख्यात्मक संदर्भों में किसी विषय की सीमाओं और कभी-कभी संबंधित विषयों द्वारा एक समान विधियों को अपनाया जा सकता है, जिससे विश्लेषण अथवा परिप्रेक्ष्य अथवा व्याख्यात्मक योजना के स्तर पर संभव समाकलन का मार्ग खुल सकता है। सामूहिक संरचना की इस दूसरी आवश्यकता की पृर्ति, या जिसे हमने विश्लेषणात्मक समाकलन कहा है, के मार्ग में अनेक कठिनाईयां हैं। प्राकृतिक विज्ञान के विपरीत, समाज विज्ञान में 'घटती सामान्यता' और 'बढ़ती जटिलता' के बीच विज्ञान का कोई एक रेखीय क्रम नहीं होता है। इसके विपरीत, कतिपय समाज विज्ञानों में, विविध सामाजिक परिघटनाओं की व्याख्याओं को घटाकर उस विज्ञान के लिए विशिष्ट एकल परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने की स्पष्ट प्रवृत्ति है। समाज शास्त्रियों पर बहुधा प्रत्येक वस्तु को समाज शास्त्र तक सीमित करने का आरोप लगाया जाता है और उनके इस अपचयवाद को बहुधा अवमानसूचक रूप से 'समाजशास्त्रीय साम्राज्यवाद' का नाम दिया जाता है। इसी प्रकार की प्रवृत्तियां डिग्री के अंतर के साथ, अर्थशास्त्रियों, राजनीति विद्वानों, भाषाविद्, मनोवैज्ञानिकों और इसी प्रकार के अन्य विद्वानों में दिखाई देती हैं।
उपर्युक्त गद्यांश में वर्णित तथ्यों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।