निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए
थॉमस माल्थस एक अंग्रेज पादरी थे, जिनका 1798 में एक 'ऐसे ऑन द प्रिंसिपल्स ऑफ पॉपुलेशन' प्रकाशित हुआ था, जिसमें उन्होंने यह दृष्टिकोण सामने रखा कि मनुष्य के जीवन निर्वाह के लिए उत्पादन की पृथ्वी की शक्ति की तुलना में जनसंख्या की शक्ति अनिश्चित रूप से वृहत्तर है। उनका मानना था कि यदि दुर्भिक्ष, रोग या युद्ध के कारण आवधिक रूप से मृत्यु दर में वृद्धि होती है और जनसंख्या की वृद्धि घटती है केवल तभी संतुलन बनाए रखा जा सकता है। इंग्लैंड और फ्रांस में 19वीं शताब्दी के कई अन्य अध्ययनों ने उनके निराशावादी विचारों को स्वीकार किया था। 19वीं शताब्दी के अंत में इंग्लैंड की जनसंख्या लगभग 10 मिलियन थी लेकिन उसकी अधिकतर खाद्य आपूर्ति को देश की सीमित भूमि में उत्पादन करना पड़ता था। भूमि पर काश्तकारी के नियमों में परिवर्तन से पुराने सामान्य खेतों को सीमाबद्ध किया और छोटे-बिखरे भूखंडों के स्थान पर बड़े खेतों के निर्माण से ग्रामीण विजनसंख्या (डिपॉपुलेशन) हुई। कस्बे, विशेषतया वे, जहां नई फैक्ट्रियों की स्थापना की गई थी, तेजी से बढ़ते गए और अत्यधिक भीड़-भाड़ वाले, गंदे और अस्वास्थप्रद हो गए। इनमें रहने वाले व्यक्ति गरीब, अल्प- पोषित, अतिरेक श्रम वाले थे, जिनका बीमारियों से प्रतिरक्षण सीमित था। इस प्रकार, यदि खाद्य आपूर्ति कम की जाती या जनसंख्या का तेजी से विस्तार होता तो ये व्यक्ति भुखमरी से ग्रस्त होते और महामारी से जनसंख्या कम हो जाती । यह इंग्लैंड के इतिहास में पहले भी दो बार हो चुका था : 14 वीं शताब्दी मैं 'ब्लैक डेथ्स' और सत्रहवीं शताब्दी में 'ग्रेट प्लेग' का संयोग कम पैदावार तथा खाद्यान कमी से रहा। भुखमरी ने बीमारियों से प्रतिरक्षण क्षमता घटाई और बुबोनिक प्लेग से हजारों व्यक्तियों की मृत्यु हुई थी। माल्थस को डर था कि कुछ इसी प्रकार की स्थिति फिर उत्पन्न होगी। उनके समय काल में हैजा, आंत्र ज्वर और चेचक (स्मॉलपॉक्स) जैसी उन बीमारियों के इलाज एवं नियंत्रण के लिए बहुत उन्नति हुई, जो इंग्लैंड और यूरोप में तब भी पांव पसार रही थी। इसका अर्थ यह है कि मृत्यु दरों और विशेषतया शिशु मृत्यु दरों में गिरावट हो रही थी। माल्थस ने परिकलन किया कि जनसंख्या प्रत्येक 25 वर्षों में दोगुनी हो सकती है, लेकिन इसके समतुल्य खाद्य आपूर्ति की अपेक्षा नहीं की जा सकती। वह 19वीं और 20वीं शताब्दी में होने वाले जबरदस्त परिवर्तनों की कल्पना नहीं कर सके थे।