निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
सारांशतः व्यक्तियों के लिए आतंरिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र की राज्यों के भीतर दखल देने की बढ़ती तत्परता बिना शर्त संप्रभुता से हटकर वैश्विक शासन की ओर आगे बढ़ने का संकेत देती है। इस दिशा में आगे बढ़ने के कुछ लक्षण दिख रहे हैं परन्तु राज्य संप्रभुता और अहस्तक्षेप के सिद्धांत अभी भी महत्त्वपूर्ण हैं और इन बिंदुओं पर कोई स्पष्ट आम सहमति नहीं है। फिर भी इस विचार के लिए कुछ समर्थन हैं कि UN चार्टर के अनुच्छेद 2 (7) की सटीक व्याख्या की जानी चाहिए कि किसी राज्य की स्पष्ट सहमति के बिना उस राज्य में कोई हस्तक्षेप नहीं हो सकता है। चीनी लोकतांत्रिक गणराज्य की सरकार द्वारा समर्थित दलीलों में संभवतः यह पक्ष अक्सर दिखता है। दूसरे पक्ष का विश्वास है कि मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए किसी देश के भीतर हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर खतरा के आधार पर ही न्यायसंगत है। शरणार्थियों की अधिक संख्या या यह विनिर्णय कि अन्य राज्य सैन्य हस्तक्षेप कर सकते हैं, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरे का संकेत है। कुछ उदारवादी यह तर्क देते हैं कि यह शर्त लचीली है और इसे कभी भी विवेकपूर्ण लगने पर मानवाधिकारों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप को न्यायसंगत ठहराया जा सकता है।
दृढ़तर पक्ष के लिए भी कुछ समर्थन हैं। सितंबर 1999 में UN के महासचिव कोफी अन्नान ने यह घोषणा की थी कि व्यक्तिगत संप्रभुता उतनी ही महत्त्वपूर्ण होती है जितनी राष्ट्रीय संप्रभुता।