Comprehension Passage

निम्नांकित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति को न तो पॉलिसी की दरें बढ़ानी चाहिए ना ही अपने समंजनकारी नीतिगत निर्णय को समाप्त करना चाहिए। निश्चित तौर पर मुद्रास्फीति में वृद्धि हुई है और वृद्धि की प्रक्रिया अनवरत रही है। अब समय आ गया है कि वृद्धि का समेकन किया जाए और क्षणिक आपूर्ति अवरोधित मुद्रास्फीति से भयाक्रांत नहीं हुआ जाए।

आपूर्तिजन्य कीमत के आघात को बंद करना स्व-पराजयी भाव है। कीमत में वृद्धि होने के फलस्वरूप मात्र में कमी आएगी और अतिरिक्त आपूर्ति का संवर्धन होगा यदि मांग के प्रशमन के माध्यम से इसे बंद किए जाने की बजाय कीमतों को तंत्र ( प्रणाली) के माध्यम से अपने तरीके से कार्य करने की अनुमति दी जाए। ऊर्जा संभार तंत्र और श्रम के क्षेत्र में कीमत संधान का दूसरे क्रम का प्रभाव ही है जिसमें उच्चतर ब्याज दरों के माध्यम से मांग में कटौती किए जाने की आवश्यकता है।

अत्यधिक मांग का संकेतक होने की बात तो दूर रही, अद्यतन उपलब्ध राष्ट्रीय आय के आंकड़ों से प्रसंकुचित खपत और प्रवाधित निवेश का उद्भासन होता है। इस वित्तीय वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद को वर्ष 2019-20 के अंत में प्राप्त आकार की पुनः प्राप्ति के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। अत्यधिक मांग द्वारा उत्पन्न मुद्रास्फीति के लिए समुपयुक्त नीतिगत अनुक्रिया आपूर्तिपरक बाधा और ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि द्वारा कारित मुद्रास्फीति के लिए पूर्णतः अनुपयुक्त होगा। तत्काल बढ़ी हुई मुद्रास्फीति कम करने का सही तरीका भारत में ऊर्जा क्षेत्र पर प्रभारित कर के बोझ को कम करना है। केन्द्र सरकार और राज्य सरकारें दोनों को कर में कटौती को साझा करना चाहिए। यहाँ तक की जब ऊर्जा को माल और सेवा कर की परिधि में लाने के मुद्दे पर उनमें सार्वजनिक सहमति व सम्मति बन जाए तो भी उन्हें यह कार्यवाही करनी चाहिए। सरकार के पास भी अपेक्षाकृत अधिक आयत शुल्क का सुखद पक्ष उपलब्ध है जिसे न्यूनतम कीमत के समतुल्य किया जा सकता है। आपूर्ति बढ़ाने के लिए उत्पादन में वृद्धि करना आपूर्ति - प्रभावित मुद्रा स्फूर्ति का दूसरा भाग है।

भारतीय रिजर्व बैंक सामान्य तौर पर तरलता की वृद्धि करने के अलावा सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योगों के द्वारा साख अभिगम में वृद्धि करने के लिए इस आशा में कई उपाय कर सकता है कि कुछ उद्यम लघु क्षेत्र में आ जाएंगे। उदाहरण के तौर पर भारतीय रिजर्व बैंक सभी बड़ी सम्पत्तियों के लिए व्यापार प्राप्तव्य छूट प्रणाली (टी आर ई डी एस) के अपने आदान खरीदने को अनिवार्य कर सरकार के अधिवेश को साकार करने में अपनी भूमिका का निर्वाह कर सकती है। यदि उससे व्यापार वित्त में कुछ कटौती अधिक मायने नहीं रखेगी।

वृद्धि के समेकन के लिए निम्नांकित में से क्या सर्वाधिक वांछनीय है?

1
ब्याज दर में कटौती
2
ब्याज दर में बढ़ोतरी
3
मांग का उपशमन
4
अतिरिक्त आपूर्ति संवर्धन

Sponsored

hivanix.in

Visit

This quiz is brought to you by hivanix.in

🌐 Web App Development

Quick Navigation