ई-कॉमर्स को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के सरकार के प्रयास खाद्य वितरण सेवाओं में दिखने लगे हैं। ग्राहक ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) का उपयोग करके ऑनलाइन ऐप पर दिए गए ऑर्डर में उल्लेखनीय मूल्य अंतर की रिपोर्ट कर रहे हैं, जो इंटरकनेक्टेड ई-मार्केट प्लेस का एक नेटवर्क बनाता है जिससे छोटे स्टोर मालिकों के लिए ऑनलाइन मांग को पूरा करना आसान हो जाता है। ONDC का उपयोग करके खाद्य वितरण के लिए प्लेटफ़ॉर्म शुल्क बाजार के नेताओं द्वारा लगाए गए शुल्क का पाँचवाँ हिस्सा बताया जा रहा है। यह मध्यस्थता की लागत में काफी कमी है। यह स्विगी और ज़ोमैटो के प्रभुत्व को तोड़ने की क्षमता भी रखता है, और अंततः अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे खुदरा प्लेटफ़ॉर्म को भी। ONDC में उपभोक्ता विकल्प बढ़ाकर और प्रवेश बाधाओं को कम करके बाजार की एकाग्रता को कम करने की क्षमता है।
यूनिफाइन पेमेंट इंटरफेस (UPI) की तर्ज पर यह खेल परिवर्तक सिरफ हो सकता है। यूपीआई अवसंरचना पर देश में डिजीटल लेनदेन में चरघातांकी वृद्धि हो रही है। तथापि, प्रौद्योगिकी स्वयंमेव वाणिज्य को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अनिवार्य और पयरित शर्त नहीं हैं। यूपीआई के कारण फोन पे और गुगल पे की प्रधान्यता की सीमाएँ उढभाषित हो गई हैं। ऐसा इस तथ्य के बावजूद हुआ है कि विनियामकों को बहुत सी कंपनियों से बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। ओएनडी सी जिसका अभिकल्प वाणिज्य मंत्रालय द्वारा तैयार किया गया था, इसका उद्देश्य ई-कॉमर्स को लोकतांत्रिक बनाना है यह इसके समान हो सकता है जबकि यह प्लेटफॉर्म नहीं है किन्तु बाजार मे पृथक रुप से कार्य वाली कंपनियो का सातत्य दुर्बल करने के लिए इसके लिए सहचिक बितनियम अपेक्षित है। उपरोक्ता संरक्षण निययमावली को पुनरुज्जीवित करने का प्रस्ताव जिससे ई-मार्केट प्लेस विक्रेताओं द्वारा ऊप विक्रि के संभाव्य हो सकता है, इससे ओ एन डी सी की प्रगति बाधित हो सकती है। आदर्श स्थिति तो यह है कि विशेषताओं को उत्पाद संबंधी जानकारी देने के लिए उत्तरदायी होना चाहिए और प्लेटफार्म को क्रेताओं को इसे संप्रेषित करने के लिए उत्तरदायी ठहराया जाना चाहए। किसी न किसी रुप में ओ एन डी सी द्वारा सृजन किए जानेनाले प्लेटफॉर्म के नेटवर्क मे ग्राहक का जोखिम बढ़ जाता है। डिजीटल खरीददरी की शुविधा के लिए गेट वे का कुकुर मुत्रे की तरह फैलते हुए गेट वे के साथ नियमावली होने चाहए जिसमें उत्पाद जोखिम से स्पष्ट पृथकीकरण हो ।
ओएनडीसी से प्रत्याशा की जाती है।
A. उपभोक्ता जेखिम कम करने की
B. बाजार संकेन्द्रिकरण (सान्द्रण) समाप्त करने की
C. मध्यस्थता करण की लागत घटाने की
D. प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की
E. बाजार की विफलता बढ़ाने की
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