Comprehension Passage

निम्नांकित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

पूरे भारत में सात एकीकृत बड़े वस्त्र एवं परिधान पार्कों के लिए मंत्रिमंडल की मंजूरी दिया जाना सर्वाधिक सार्थक है। इसके फलस्वरूप कार्यस्थल पर मूल्यवर्धन को बढ़ावा मिलेगा, परिमाणात्मक सुलाभ और क्षेत्र की प्रसुविधा प्राप्त होगी, संभारतंत्र और स्रोत पर होने वाले व्यय में कमी आएगी और सामान्यतया सर्वग अंत्रक विशिष्ट प्रतिस्पर्धी लाभ में अभिवृद्धि होगी।

सूत, वस्त्र और रेडीमेड कपड़े का वैल्यू चेन पूरे राष्ट्र में फैला हुआ और बिल्कुल खंडित है। इसलिए, उदाहरण के तौर पर, गुजरात और महाराष्ट्र में जबकि कपास उगाया जाता है तो तमिलनाडु में सूत की कताई होती है और इसका प्रसंस्करण राजस्थान और गुजरात में कराया जाता है और वस्त्र-निर्माण का कार्य अधिकांशतः राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, बेंगलुरू और कोलकता में होता है। 1,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले हुए प्रस्तावित मेगा पार्कों के फलस्वरूप एक ही अवस्थिति में बुनाई, रंगाई, छपाई, फैशन डिजाइनिंग और परिधान निर्माण की सुविधा उपलब्ध होगी। उन पार्कों में मुख्य अवसंरचना यथा उष्मीयन केन्द्र, प्लग एण्ड प्ले सुविधा तथा कैशल विकास की इकाइयां उपलब्ध होगी ताकि वस्त्र और परिधान के क्षेत्र में आधुनिक प्रवृति से सुअवगत हुआ जा सके। वस्त्र के क्षेत्र में निर्मात की संभावना बहुत अधिक है। हमें तत्पर नीति-निर्माण के माध्यम से अनुकूल सहायक और नवोन्मेषी पारिस्थिति की बनाने की आवश्यकता है।

केन्द्र सरकार ने हाल ही में वस्त्र उद्योग के लिए 10,683 करोड़ रु. की उत्पादन से सहबद्ध प्रोत्साहन योजना की घोषणा की गई है। टेक्स्टाइल पार्क स्कीम में 4.445 करोड़ रु. का परिव्यय होगा और इसके माध्यम से गुच्छ के रूप में परियोजना विकास के लिए सहायता प्रदान किया जाता है। राज्य एवं केन्द्र सरकार के करों में निर्यातोन्मुख इकाईयों को छूट दिए जाने के संबंध में हाल में लिए गए निर्णय तथा शुल्क (लेवी) से भी सहायता मिलेगी। किन्तु वास्तवीकता यह है कि भारत से किए जाने वाले निर्यात में वस्त्र का अंश घटा है और अब यह दो अंकों में भी नहीं है। क्राइसिल द्वारा किए गए हालिया अध्ययन से उल्लेख किया गया है कि मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) नहीं होने के कारण हमारा निर्यात दुष्प्रभावित होता है। वस्त्र पार्कों में किए गए शालीन व समुचित कार्य आधुनिक युग में पुनः प्रचलन में आ जाएंगे।

भारतीय वस्त्र उद्योग में निम्नांकित में से किस राज्य-का योगदान (अंशदान) नहीं है : 

1
पश्चिम बंगाल
2
राजस्थान
3
पंजाब
4
तमिलनाडु

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