निम्नलिखित गद्यांश को सावधानीपूर्वक पढ़ें तथा नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दें
पूंजी प्रवाह, विनिमय दरें और ब्याज की दरें राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए तात्कालिक चिंता का विषय है। विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंक अत्यधिक पूंजी प्रवाह के साथ अलग-अलग पद्धतियों को अपना रहे हैं। विदेशी (पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट) निवेश सूची का विनिमय दरों और व्यापार की गई परिसंपत्तियों के मूल्यांकन तथा विभिन्न सरकारी एवं निगमित प्रतिभूतियों के उपार्जन पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है।
महामारी के उत्तर परिदृश्य और हाल के रूस यूक्रेन युद्ध की परिस्थिति में आरबीआई निर्यातकों एवं आयातकों दोनों को संरक्षित करते हुए विनिमय दरों को प्रभावित रखने के विभिन्न विकल्पों पर कार्यशील है। विनिमय दरों को वांछनीय स्तर तक रखने के लिए जिस एक प्रक्रिया को आरबीआई अपना रहा है, वह है घरेलू मुद्रा परिसंपत्तियों के बदले में अधिसूचित वाणिज्यिक बैंकों से निवल विदेशी विनिमय संपत्तियों का अधिग्रहण करना। तरलता के प्रवाह स्वभावतः मुद्रा स्फीतिकारक हैं। आरबीआई ने वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए सहज जीडीपी दर का प्रेक्षण किया है और उसका यह मानना है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की मुद्रा स्फीतिदर 5.3% के सामान्य स्तर तक रहेगी।
आरबीआई के गवर्नर के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023 में मौजूदा खुदरा मुद्रास्फीति दर के 4.5% तक रहने की संभावना है। इसी दृष्टिकोण के साथ 22 मई 2020 से रेपो दर और रिवर्स रेपो दर के भी क्रमश 4% और 3.35% रहने की संभावना है। आर्थिक प्रगति और मुद्रास्फीति के बीच का संतुलन दृष्टिगोचर है। यद्यपि आरबीआई के दर स्थिर (एक समान) है, फिर भी ऋणदाताओं के लिए अल्पावधिक एवं दीर्घावधिक भार अभी भी अप्रत्याशित है।