निम्न पाठ को पढ़ें और दिए गए प्रश्नों के उत्तर दें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सिर्फ एक दल नहीं, बल्कि एक आंदोलन था। इसमें व्यापक रूप से अलग-अलग राजनैतिक तथा वैचारिक दृष्टि रखने वाले व्यक्ति और समूह शामिल थे। यह मुख्यधारा का संगठन था, लेकिन एकमात्र धारा नहीं था। स्पष्ट है कि गैर-कांग्रेसी आंदोलनों को कभी समानांतर धाराओं के रूप में नहीं देखा गया, जैसा कि कुछ लोगों ने कहा है। हालांकि वे कांग्रेस के बाहर थे, उनमें से ज्यादातर उससे सचमुच अलग नहीं थे और किसी भी चरण सचमुच अलग नहीं थे और किसी भी चरण में वे कांग्रेस का विकल्प नहीं बने। सिर्फ एक जिसके बारे में कहा जा सकता है कि उसने राजनीति की वैकल्पिक धारा बनाई, वह थी सांप्रदायिक और जातिवादी आंदोलनों की धारा, जो न राष्ट्रीय थी और न साम्राज्यवाद विरोधी 1919 से 1942 के बीच अनगिनत जन आंदोलनों के अलावा अनेक सत्याग्रह अभियान चलाए गए। यह आंदोलन अनेक रूपों और चरणों में नए किस्म की राजनीति लोगों के सामने ले आया इसने उनके धर्म, जाति और स्थान आधारित आधुनिकता पूर्व चेतना या पारंपरिक शासक के प्रति निष्ठा को नहीं झकझोरा। हालांकि कुछ मामलों में गांवों में कुछ आंदोलनों में अनुशासन लाने के लिए जातिगत ढाँचे का इस्तेममाल किया गया, जबकि आंदोलन के लक्ष्य और उसकी मांगों का जाति से कोई लेना-देना नहीं था। भारतीय संस्कृति के उपनिवेशीकरण से बचाव के लिए 19वीं शताब्दी में जो सामाजिक और धार्मिक सुधार आंदोलन खड़े हुए, वे भी राष्ट्रीय आंदोलन में समाहित हो गए। जन आंदोलन के रूप में भारत का राष्ट्रीय आंदोलन एक तरफ जहाँ ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने के लिए विविध प्रतिभाओं, ऊर्जाओं और व्यापक रूप से लोगों की क्षमताओं का इस्तेमाल कर पाया, वहीं रचनात्मक कार्यक्रमों पर भी बल दिया गया।
निम्न में से कौन आंदोलन की वैकल्पिक धारा नहीं थे, पर उसके समानांतर अवश्य थे ?
(A) गदर आंदोलन
(B) सविनय अवज्ञा आंदोलन
(C) इंडियन नेशनल आर्मी
(D) रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह
नीचे दिए गए विकल्पों में सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए: