निम्नलिखित गद्यांश को पढ़े और उसके नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दें:
प्राचीन भारत ने हमें ग्रन्थों का एक विशाल भंडार प्रदान किया है, जो दो हजार वर्षों से भी अधिक समय से बौद्धिक एवं साहित्यिक गतिविधियों का प्रतिनिधित्व करते हैं और जिनका क्षेत्र अत्यन्त व्यापक हैं। प्राचीनतम साहित्य ऋग्वेद संहिता कम से कम तीन हजार वर्ष पुरानी है अथवा यह उससे भी काफ़ी प्राचीन हो सकती है। भारत की प्राचीन सभ्यता पर प्रकाश डालने वाले साहित्य की धारा निरन्तरता के साथ शताब्दियों तक प्रवाहवान रही, जिसने राजनैतिक इतिहास के अलावा मानवीय क्रिया कलाप के सभी क्षेत्रों को समाविष्ट किया। ऐसी स्थिति दुनिया की अन्य संस्कृतियों में दिखाई नहीं देती। साहित्य के इस विशाल भण्डार में धर्म और दर्शन, नीति शास्त्र, कर्मकांड एवं धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ सृष्टिशास्त्र, ब्रह्मांड विद्या, भूगोल, खगोलशास्त्र एवं आनुषंगिक विज्ञान, राजनीतिक एवं आर्थिक सिद्धान्त एवं व्यवहार अर्थात् संक्षेप में लौकिक जीवन के समस्त क्षेत्र समाहित हैं। इसमें विशद धार्मिक ग्रन्थों के अलावा शुद्ध साहित्यिक परम्परा के ग्रन्थ जैसे महाकाव्य, गीतिकाव्य, काव्य, नाटक, गद्य, चरित ग्रन्थ और लोक कथाएँ सम्मिलित हैं। यह साहित्य अपने स्वरूप की दृष्टि से जितना भारी-भरकम है, उतना ही अपनी विषय वस्तु की दृष्टि से समृद्ध भी है। यद्यपि यह भारत के राजनैतिक इतिहास के पुनर्निर्माण में अधिक सहायक नहीं हैं किन्तु यह भारतीय सभ्यता और संस्कृति के विविध चरणों के विकास के अध्ययन की दृष्टि से अत्यन्त उपयोगी है। प्राचीन मिस्र, पश्चिम एशिया, चीन और यहाँ तक कि ग्रीक एवं रोम की सभ्यताओं के अध्ययन हेतु ऐसे संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
भारत के महान् दार्शनिक वेदान्त-देशिक ने एक संदेश काव्य (गीति काव्य का एक प्रकार) लिखा था, जिसका नाम है :