निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़े और नीचे दिए गए प्रश्न के उत्तर दें:
पूर्व मध्यकाल के राजनीतिक इतिहास में राज्यों और भूमि-अनुदानों का विस्तार देखने को मिला। ब्राह्मणों को दिए जाने वाले भूमि-अनुदानो ने राजनीतिक शक्ति के विधिमान्यकरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई और कृषि संबंधो पर उसका महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ा। उपमहाद्वीप के विभिन्न भागों में कृषि का विस्तार हुआ और ग्रामीण समाज अत्यधिक स्तरीकृत बन गया। यह शहरी अवनति का काल नहीं था। यह दक्षिण भारत को देखने से बिल्कुल स्पष्ट है कि यहाँ शिल्पों, शहरों, व्यापार और व्यापार संघों का पर्याप्त विकास हुआ। उपमहाद्वीप चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच व्यापारिक संबंधों में काफी विस्तार हुआ। भक्ति पूजा धार्मिक विचार और व्यवहार की प्रमुख विशेषता थी। मंदिर न केवल पवित्र स्थल थे, बल्कि शहरी केन्द्रों के मूल और राजनीतिक प्रतीक भी थे। उन्हें पर्याप्त संरक्षण मिला जिसके कारण वे विभिन्न सामाजिक समूहों के क्रियाकलापों और आकांक्षाओं के केन्द्र बिन्दु बन गए। संस्कृत और देशी भाषाओं में अनेक पुस्तकों की रचना सहित सांसकृतिक क्षेत्र में पर्याप्त विकास हुआ। मंदिर स्थापत्यकला और मूर्तिकला का विकास और परिष्करण हुआ, विभिन्न क्षेत्रीय शैलियाँ स्पष्ट दिखाई पड़ने लगीं। 600 से 1200 ई. के दौरान राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्तरों पर घअनाक्रम ने विशिष्ट क्षेत्रीय संघटनों और प्रतिमानों में निश्चित रूप धारण किया।
ब्राह्मणों को दिए गए भूमि-अनुदानों का क्या परिणाम हुआ?
(i)उन्होंने शासकों को स्थिति को सुद्दृढ़ किया।
(ii) इससे कृषि का विकास हुआ क्योंकि प्राय: अनुदान प्राप्तकर्ता को खेती के लिए नई भूमि लानी पड़ती थी।
(iii) भेदभावविहीन ग्रामीण समाज का और स्तरीकरण हुआ।
(iv) धार्मिक संस्थाओं और व्यक्तियों को भूमि-अनुदान प्रदान करने की प्रथा की शुरूआत 600 ई. से हुई।
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