गद्यांश को पढ़िये और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
हमारे देश में अध्यापकों को पारंपरिक रूप से अत्यधिक सम्मान का पद प्राप्त है। धार्मिक नेताओं और समाज सुधारकों को भी लोगों के शिक्षक के रूप में संबोधित किया गया है। हजारों में से सैकड़ों शिक्षक आज भी अपने शिष्यों एवं समुदायों द्वारा सम्मानित हो रहे हैं। तथापि, शिक्षकों की समग्र प्रतिष्ठा में पिछले कुछ दशकों के दौरान कमी आई है। इसके कारणों की पड़ताल करना कठिन नहीं है: उनकी सेवा शर्तों में अवनति, विविक्ति (एकाकीपन) जिसमें शिक्षक कार्य करते हैं, शिक्षा प्रणाली का प्रतिभासिक विस्तारण, शिक्षकों के प्रशिक्षण का निम्नीकरण, एक सामान्य मत कि अधिकांश शिक्षक अपने कर्तव्यों का निर्वहन समुचित रूप से नहीं करते हैं, समाज में मूल्यपरक शिक्षा में परिवर्तन आदि। शिक्षकों की प्रतिष्ठा शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डालती है, और 'इसकी' अनेक परवर्ती बुराइयों का श्रेय तटस्थ रूप से उस समाज को जो शिक्षको पर निर्भर रहा है तथा उस तरीके को जाता है जिसमें अनेकों शिक्षकों ने अपने कार्यों को निष्पादित किया है।