निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए व उसके बाद पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।
अप्रैल-2010 से प्रभावी हुए शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम की धारा 31 के अनुसार, इस अधिनियम में निहित अधिकारों के कार्यान्वयन की निगरानी राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) और संबंधित राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एससीपीसीआर) द्वारा की जाएगी। यह एक नयी मौलिक विशेषता है तथा भारत के विधायी इतिहास में एक पूर्व उदाहरण स्थापित करता है, जिसमें एक स्वायत्त तटस्थ निकाय पर मौलिक अधिकार के कार्यान्वयन की देखरेख का दायित्व सौंपा गया है। यह स्वतंत्र निगरानी की एक प्रणाली स्थापित करने का एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करता है जो यह सुनिश्चित करता है कि संविधान में गारंटीकृत अधिकार वास्तव में अधिकार धारकों को प्रदान किए जा रहे हैं। साथ ही यह एक बड़ी चुनौती भी है क्योंकि इसमें एक ऐसी प्रणाली का निर्माण शामिल है जो अंतिम बच्चे से प्रतिक्रिया प्राप्त करने और उस पर इस तरीके से प्रतिक्रिया देने में सक्षम है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि अधिकार यथार्थ में संरक्षित हैं। यहाँ यह इंगित करने योग्य है कि शिकायत निवारण व निगरानी अलग-अलग प्रकार्य हैं और अंतः निर्भर है। दूसरे शब्दों में, शिकायत निवारण व्यवस्था की अनुपस्थिति में निहित है कि अधिकारों के रूपरेखा की निगरानी में न्यायपालिका का हस्तक्षेप अनिवार्य रूप से होगा। दूसरी ओर एक सुव्यवस्थित शिकायत निवारण तंत्र न्यायपालिका के स्थान पर व्यवस्था के साथ अंतक्रिया के जरिए निगरानी को प्रभावी बनाने की अनुमति देता है। इसका अर्थ है कि शिक्षा के अधिकार के युग में, एस.एस.ए. को प्रभावी रूप से कार्य करने के लिए इसे अधिनियम द्वारा अधिदेशित शिकायत निवारण और निगरानी संरचनाओं, दोनों, से लिंक बनाने होंगे।