"इस मन्दिर की आयोजना कुछ असाधारण सी है। इसका तल-घर समुद्र के किनारे अवस्थित है। इसलिए स्वभावतः मन्दिर के अन्य भागों को इसके पीछे वाले हिस्से में रखा है । मध्य के भवन को एक बड़ी सी दीवार घेरे हुए हैं और खुले दलान में पश्चिम से प्रवेश करना पड़ता है। लगता है कि पश्चिमी दोर पर बाद में दो और देवस्थानों को जोड़ दिया गया जिसमें से एक छोटा विमान है जिसके सर्वप्रथम दर्शन पर वह हमें मन्दिर का मुख्य प्रवेश-द्वार मालूम पड़ता है। इस प्रकार मन्दिर के जो भाग बढ़ाए गए हैं उनके कारण तरवर्ती मन्दिर और उसके दो विमानों का रूप असमान्य सा है पर किसी भी कदर कम मनोहर नहीं ।"
उपर्युक्त गद्यांश किस मन्दिर की वास्तुकला का वर्णन करता है?
1
कोणार्क मन्दिर
2
मामल्लपुरम
3
कुमारी मन्दिर
4
द्वारका