इस बात पर बहस जारी है कि क्या ब्रिटिश शासन के अधीन भारतीय अर्थव्यवस्था में वृद्धि या ठहराव या प्रगतिशील मंदी की विशेषता थी या अभी तक समाप्त नहीं हुई है। बहस के अनिर्णायक चरित्र का प्रमुख कारण क्या है?
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गुणात्मक साक्ष्य की विविध प्रकार से व्याख्या की जाती है।
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संबंधित गुणात्मक आंकड़े अपर्याप्त हैं।
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लेखक विशेष की वैचारिक प्राथमिकताएँ।
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भारतीय अर्थव्यवस्था का औपनिवेशिक चरित्र।