गद्यांश को सावधानी से पढ़े। इस गद्यांश पर आधारित प्रश्न का उत्तर दीजिए।
शिक्षा में तकनीक के बारे में दार्शनिक चिंतन, जैसे कि यह अस्तित्व में है, को तीन श्रेणियों में रखा जा सकता है : मूलवादी, प्रेरकवादी और बहुलवादी। यह तकनीक निर्धारण के प्रत्येक प्रश्न में अंतर्भूत उत्तर के समरूप हैं : जो है धनुष और तीर से लेकर लेखन और कम्प्यूटर तक तकनीकें मानव कार्राई और विचार को निर्धारित करती हैं या कि क्या इसका विपरीत भी सत्य है। मूलवादियों के लिए, तकनीक मानवीय मामलों में सर्वोपरि है, इसमें अच्छी या बुरी अंतर्भूत विशेषताएँ हैं और तत्पश्चात् यह मानवता को मुक्त करने या गुलाम बनाने के लिए कार्य करती है। हालाँकि प्रेरकवादियों के लिए, उपकरण और तकनीकें महज वस्तुएँ हैं जो नैतिक जीवन के लिए मानवीय प्रयोजन के सजीवन का इंतजार करते हैं; कहीं न कहीं, कोई न कोई, व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से तकनीक के लाभ या हानि के लिए हमेशा उत्तरदायी होता है। इन दोनों के विपरीत बहुलवादी शैली कठोर सत्तामूलक प्रतिबद्धताओं से बचती है, तकनीक की जटिलताओं परे ध्यान केन्द्रित करती है; और शीघ्रतापूर्वक किए गए सामान्यीकरण से बचने तथा तकनीकी परिघटना को उसकी विशिष्ट स्थिति में समझने पर बल देती है।
शिक्षा में, प्रथम दो श्रेणियों को "पक्षधर" या "विरोधी" के अनुसार उपविभाजित किया जा सकता है। तकनीक समर्थक मूलवादी कहते हैं कि शिक्षकों की विधियों और उद्देश्यों को तकनीकी नवोन्मेष के अनुरूप होना चाहिए। कुछ अनुदेशनात्मक अभिकल्प सिद्धांतवादी यहाँ तक कहते हैं कि तकनीक मध्यस्थित अनुदेश प्रदायगी के पक्ष में अध्यापक तैयारी को बड़े स्तर तक त्यागा जा सकता है।