Comprehension Passage

निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

संगठनात्मक परिवर्तन एक जटिल और सतत चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें अनेक अनुक्रमिक पहलु होते हैं। योजनाबद्ध परिवर्तन की प्रक्रिया में, अनेक कारक जैसे कॉर्पोरेट प्रबंधन, बाह्य परामर्शदाता, उनके समतुल्य, कार्यान्वयन दल, मुख्य क्रियान्विति कारी तथा कार्य दल आदि शामिल होते हैं। यहाँ उल्लेखनीय है कि प्रत्येक अभिकर्मी एक खास प्रकार्य को निष्पादित करता है।

कार्य प्रक्रिया के प्रारंभिक दौर में समय एवं ऊर्जा का विनियोजन बाद में चलकर कार्य निष्पत्ति में प्रगति को सुचारू रूप देता है। ध्यातक्ष है कि परिवर्तन को लागू करना अपने आप में एक जटिल प्रक्रिया है तथा इसके लिए विशेष ध्यान अपेक्षित है। नियोजन के उपरांत प्राय: क्रियान्विति तथा परिवर्तन का संस्थायन एवं स्थिरीकरण की ओर अग्रसर होना पाया जाता है। इस क्रम में प्रगति की समीक्षा आवश्यक है तथा यह कार्य परिशुद्धता की ओर ले जाने में स्वल्प रूप में प्रतिपुष्टि लूप का कार्य भी करती है।

परिवर्तन लागू करने में सर्वदा एक प्रकार का प्रतिरोध विद्यमान होता है। यदा-कदा यह प्रतिरोध संभव परिणामों के बारे में संस्था को सकारात्मक रूप में चेतावनी देने का भी कार्य करता है। सामान्यतः इसके प्रतिरोध कई प्रकार के होते हैं एवं वास्वतकि प्रक्रियाओं के प्रति ध्यान न देने के फलस्वरूप भी घटित होते हैं। प्रतिरोध झेलने के लिए प्रभावी रणनीतियों को ढूंढ निकाला जा सकता है बशर्ते कि प्रतिरोध के स्रोतों को समझा जाए एवं उनसे निपटा जाए।

निम्नलिखित में से किसके द्वारा किसी संगठन में परिवर्तन का स्थिरिकरण किया जा सकता है?

1
व्यवस्थित नियोजन और कार्यान्वयन
2
नियमित प्रतिपुष्टि उपलब्ध कराना
3
परिवर्तन की प्रक्रिया की बारीकी से निगरानी करना
4
परिवर्तन के कार्यान्वयन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना

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