निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें एवं प्रश्नों का उत्तर इसके आधार पर दें।
महात्मा गांधी ने कहा था : शिक्षा "चेतना के विकास और समाज की पुनर्रचना के लिए मूलभूत उपकरण" है। मानव अधिकारों का सार्वभौम घोषणा पत्र, 1948 (यू डी एफ आर) बताता है कि "हर व्यक्ति को शिक्षा का अधिकार है। कम से कम प्रारंभिक और आधारभूत स्तरों पर शिक्षा को नि:शुल्क होना चाहिए। प्रारंभिक शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए
यह इक्कीसवीं शताब्दी को ज्ञान की शताब्दी का नाम देने से और समुदाय में शिक्षा को मानव विकास के सूचक के रूप में मान्यता मिलने से पहले, कहा गया था। इस पहलू को मान्यता देते हुए, भारत के संविधान ने अनुच्छेद 45 में, प्रारंभिक रूप से, राज्य की नीति के नीति-निर्देशक सिद्धांतों में दस वर्षों में चौदह वर्ष तक की आयु के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने के लक्ष्य को अधिनियमित किया। लेकिन आधी शताब्दी से अधिक समय बीत जाने पर भी यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है। इसके महत्व पर बल देने के लिए एक संविधान संशोधन के द्वारा अनुच्छेद 21-A में शिक्षा को एक मौलिक अधिकार के रूप में स्थान दिया गया। इसके साथ ही, इससे संबंधित संशोधन अनुच्छेद 45 और 51-A में भी किए गए।
इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षक एक साधन है। इसलिए इस कार्यक्रम की सफलता के लिए गुणवत्ता वाले शिक्षक उपलब्ध कराने में शिक्षक की शिक्षा की गुणवत्ता एक महत्वपूर्ण अवयव है। शिक्षा आयोग का प्रतिवेदन कहता है कि : "भारत का भाग्य उसकी कक्षाओं में ही आकार ग्रहण कर रहा है, हमारा विश्वास है कि यह बात अब केवल शब्दाडंबर नहीं रही।" इस प्रक्रिया में शिक्षक मुख्य कर्ता है। महात्मा गांधी ने कहा था : "मैंने हमेशा यह अनुभव किया है कि छात्र की सच्ची पाठ्यपुस्तक शिक्षक स्वयं होता है।" एक सच्चा शिक्षक एक आदर्श होता है जो अपने छात्रों के सच्चे संभाव्य को सामने लाने के लिए उनकी चिंतन प्रक्रिया को प्रेरित करता है। वह केवल अनुभूतिजन्य ढंग से नहीं, अभ्यास से पढ़ाता है।