निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़े और इसके नीचे दिए पाँच प्रश्नों का उत्तर दें:
जैसा कि किसी भी बदलाव के साथ होता है, गुण-दोष को ध्यान में रखें बिना, समावेशन के सफल कार्यान्वयन में कई अवरोध हैं। इन अवरोधों में संगठनात्मक अवरोध, अभिवृत्तिगत अवरोध एवं ज्ञान सम्बन्धी अवरोध शामिल हैं। विद्यालय एवं कक्षाएँ किस प्रकार से व्यवस्थित है, यह सब संगठनात्मकता अवरोध के अन्तर्गत आते हैं। इसके अन्तर्गत भौतिक व्यवस्था के साथ-साथ समय-सारिणी को कैसे तैयार किया गया है तथा शिक्षकों को किस प्रकार से कक्षाएँ दी गयी हैं, भी आते हैं। अभिवृत्तिगत अवरोद्य अध्यापकों, प्रशासकों और विद्यालय के अन्य कर्मियो के दिव्यांग/निशक्त विद्यार्थीयों और समावेशन के प्रति अभिमतों (बीलिफस) पर ध्यान केन्द्रित करते हैं। ज्ञानगत अवरोधों के अन्तर्गत सामान्यतया समावेशी शिक्षण रणनीतियों और दिव्यांग विद्याथियों बारे सीमित ज्ञान आता है। जब ऐसे अवरोधों के साथ सफल समावेशी शिक्षा कार्यक्रम में कठिनाइयाँ आती हैं तो विविध रणनीतियों के साथ ही प्रत्येक से उभरा जा सकता है। विद्यालय का यह दायित्व है कि ऐसे अवरोधों से ऊपर उठे ताकि निःशक्त/दिव्यांग विद्यार्थी भी अपने गैर-निःशक्त/गैर-दिव्यांग साथियों के बराबर उनके संग समुचित शिक्षा प्राप्त कर सकें।