Teaching UGC NET Mock Test Series 2025 (Paper 1 & 2) Educational Studies Indian schools of philosophy Jainism
नीचे दो कथन हैं : एक अभिकथन A के रूप में लिखित है, तो दूसरा उसके कारण R के रूप में लिखित है।
अभिकथन A : जैन धर्म में किसी सार्वभौम आत्मा अथवा ईश्वर की मान्यता नहीं है।
कारण R: यह इसलिए है क्यों कि इनके अस्तित्व को स्वीकारने से नैतिक दायित्व और व्यक्तिगत प्रयास निरर्थक हो जाएंगे।
उपरोक्त कथनों के प्रकाश में नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
1
A और R दोनों सत्य हैं तथा R. A की सही व्याख्या है।
2
A और R दोनों सत्य है लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
3
A सत्य है लेकिन R असत्य है।
4
A असत्य है लेकिन R सत्य है।