नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़ें और प्रश्न का उत्तर दें:
आज जिस रूप में कक्षा में शिक्षण-शास्त्र व्यवहृत होता है वह अधिकांशतः शिक्षक-केन्द्रित, निवेश-बहिर्वेश मॉडल है। इसमें अध्यापक द्वारा निवेश अपेक्षित होता है। इसमें अधिगमकर्त्ता में एक आद्यरूप बहिर्वेश परिकल्पित होता है जो इस विचार से आबद्ध होता है कि 'जो परीक्षा के लिए प्रासंगिक है, वह शिक्षण के लिए भी प्रासंगिक है।' किन्तु, संरचनावादी तंत्र में अधिगम के परिप्रेक्ष्य में, शिक्षण-अधिगम प्रक्रम (TLP) की 'वांछनीयता' में अधिगमकर्त्ता द्वारा किये जाने वाले निवेश से उत्पन्न अधिगमकर्त्ता का बहिर्वेश शामिल होता है। इसे अधिगमकर्त्ता-केन्द्रित निवेश-बहिर्वेश मॉडल कहा जा सकता है। तथापि, TLP की इष्टतमता से जनित सार्थक अधिगम अधिकतमकरण के लिए अध्यापक और अधिगमकर्त्ता को पृथक कर के नहीं देखा जा सकता। इस प्रकार 'आदर्शत:' TLP के सम्मिश्र मॉडल में शिक्षक और अधिगमकर्त्ता दोनों का निवेश शामिल होता है और अधिगमकर्त्ता द्वारा एक नियोजित निर्मित्ति की अपेक्षा की जाती है। इसका अर्थ है कि 'आदर्श स्थिति' तक पहुँचने के लिए 'यथार्थ' को 'वांछनीयता' का सहायक होना चाहिए। हम इसे महत्वपूर्ण कहते हैं क्योंकि निर्णायक क्षेत्र अध्ययन-आधारित साक्ष्यों के माध्यम से संरचनावाद, इसकी वकालत करता है कि; अधिगमकर्त्ता अपने ज्ञान का निर्माण करता/करती है, कोई भी अधिगमकर्त्ता वैयक्तिक निर्मित्तियों (वैकल्पिक संकल्पनाओं) से रहित हो कर कक्षा में प्रवेश नहीं करता है और ज्ञान का निर्माण संकल्पना-निर्धारण की एक प्रक्रिया के माध्यम से होता है। अतः सार्थक अधिगम को अधिकतम बनाने के लिए यह जानना आवश्यक है कि अधिगमकर्त्ता कौन सी योगदायी संरचनाएं (निवेश) अपने साथ ले कर कक्षा में प्रवेश करता/करती है और जिसके प्रयोग के द्वारा वह नई संरचनाओं (बहिर्वेश) का निर्माण करने वाला/वाली है।
संरचनावादी उपागम किसकी वकालत करता है?
A. अधिगमकर्त्ता अपने ज्ञान का निर्माण करता है।
B. अध्यापक ज्ञान का अग्रदूत होता है।
C. पुस्तकें ज्ञान का मूल स्रोत हैं।
D. प्रत्येक अधिगमकर्त्ता की अपनी स्वयं की निर्मित्ति होती है।
E. संकल्पना-निर्धारण की प्रक्रिया व्यक्ति-निष्ठ होती है।
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