निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दें:
बहरहाल मनुष्य की नस्ल अभी आरंभ ही हुई है। क्रमिक विकास की दृष्टि से मानव मात्र वस्तुतः बहुत छोटे बालक; कुछ माह के शिशु हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी पर छत्रिक (जेलीफिश) के स्वरूप में किसी प्रकार का जीवन रहा है और इस प्रकार का जीवन लगभग बारह सौ मिलियन वर्ष पूर्व था; किन्तु मनुष्य केवल एक मिलियन वर्ष से अस्तित्व में रहा है और लगभग आठ हजार वर्ष से बाह्य क्षेत्र में सभ्य मनुष्य रहे हैं। इन आंकड़ों की सटीक जानकारी प्राप्त करना कठिन है; इसलिए हम इन्हें विगत समय के परिपेक्ष्य में देखें। मान लीजिए यदि हम पृथ्वी पर जीवित प्राणियों का इतिहास एक सौ वर्ष मानते हैं तो मनुष्य का पूरा भूतकाल लगभग एक माह बैठता है और उस माह के दौरान सात से आठ घंटे के मध्य की सभ्यता रही है। इस प्रकार आप पाते हैं कि अधिगम का अत्यल्प समय रहा है किन्तु बेहतर अधिगम के लिए अपार समय मिलेगा। मनुष्य के सभ्यतापूर्ण विगत काल को लगभग सात या आठ घंटे मानकर हम उसके भविष्य का आकलन कर सकते हैं अर्थात अभी और सूर्य के अत्यधिक प्रशीतित होने की दशा में जब पृथ्वी पर जीवन का संधारण नहीं हों पाएगा, दोनों के मध्य लगभग एक सौ हजार वर्ष का कुल समय है। इस प्रकार मानव अपने सभ्य जीवन काल के आरंभ में ही है और मेरा कहना है कि हमें बहुत अधिक उम्मीद नहीं रखना चाहिए। मनुष्य का भूतकाल कुल मिलाकर पूर्णतः जंगली जीव की भांति रहा है, वह युद्ध और डराने धमकाने के कार्य में लिप्त रहा है। हम सभ्य लोगों से भी ऐसी उम्मीद नहीं रखनी चाहिए कि उन्होंने ये चीजें नहीं की होगी। हम केवल इतना कह सके हैं कि वे कभी-कभार किसी कोई अन्य कार्य किए होंगे।
मानव की गाथा कुल मिलाकर इसी प्रकार की रही है। यहां तक कि हमारे अपने स्वयं के युग में भी विगत काल में दो युद्ध लड़े गए हैं जिनमें लाखों लोग मरे गए या उन्हें उदीर्ण कर दिया गया और आज जब यह सत्य है कि लोग गलियों में संघर्ष नहीं करते और एक दूसरे की हत्या नहीं करते हैं।