नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का उत्तर दीजिए:
वर्तमान विनाशकारी स्थिति व घटना के मुख्यतः दो कारक हैं। पहला जलवायु परिवर्तन के फलस्वरूप वर्षा प्रारूप में परिवर्तन है। मानसून गतिविधि परिवर्तित हो गयी है और कई दिनों में होने वाली वर्षा अब एक दिन या घंटों में ही समाप्त हो जाती है, फलस्वरूप मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में मृदा और अनेक मानव निर्मित ढांचे इसका प्रभाव वहन नहीं कर पाते हैं। पश्चिमी घाट के साथ कई अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र, अतिक्रमण, वनों के विनाश, खुदाई और खनन, मानव बस्तियों के निर्माण, उद्योगों व अन्य वाणिज्यिक उद्धमों की स्थापना, अनियंत्रित व अनियमित पर्यटन जैसी गतिविधियों के उन्नयन व जैव विविधता के कम होने, आदि के कारण, अत्यधिक प्रभावित हो रहे हैं ये सब अलग-अलग और सामूहिक रूप से पश्चिमी घाट क्षेत्र, जो पारिस्थितिकीय दृष्टि से अत्यधिक संवेदी और मूल्यवान हैं, की वर्तमान स्थिति के लिए उत्तरदायी हैं पश्चिमी घाट का एक राज्य, जिसने पर्यावरण को सर्वाधिक क्षति पहुंचाई है, उसे ही सर्वाधिक हानि हुई है।
माधव गाडगिल समिति ने पश्चिमी घाट पर्यावरण के विनाश का अध्ययन किया और स्थिति के प्रतिकार के लिए तर्कसंगत अनुशंसाएं की, इस समिति की रिपोर्ट को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया और इसके प्रस्तावों को अनसुना करने के लिए डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक अन्य समिति गठित कर दी गई। कस्तूरीरंगन समिति की अनुशंसाओं को भी कार्यान्वित नहीं किया गया। गाडगिल ने 2013 में ही भविष्य के लिए चेतावनी दी थी कि होने वाली त्रासदी को कोई युग नहीं वरन केवल चार-पांच वर्ष ही लगेंगे। ये असामान्य प्राकृतिक घटनाएं और इनके कारण हुये अत्यधिक विनाश अब शायद भविष्य की बड़ी आपदाओं की सूचना मात्र हों सकती हैं। जान की हानि की भरपाई नहीं हो सकती है और प्रकृति को स्वयं के पुनर्निर्माण में सैंकड़ों वर्ष लगेंगे। इससे भी बड़ी त्रासदी यह है कि इस त्रासदी से कोई सबक ही नहीं सीखा जाता है।
निम्नलिखित में से किन कारकों ने पश्चिमी घाट को प्रभावित किया है?
A. अत्यधिक संवेदनशील जैव विविधता
B. मानव बस्तियों का निर्माण
C. क्षेत्र की वनस्पति और जीव-जंतु
D. अनियंत्रित पर्यटन का उन्नयन
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए: