गद्यांश को पढ़िए व प्रश्न का उत्तर दीजिए:
दबाव के अनेक सांगठनिक कारक हैं- विशेष कर कार्य और भूमिका संबंधी मांगों- जिन्हें प्रबंधन नियंत्रित करता है और इसलिए इन्हें संशोधित अथवा परिवर्तित किया जा सकता है। विचारणीय रणनीतियों में बेहतर कर्मचारी चयन व कार्य स्थानन, प्रशिक्षण, यथार्थ परक बाह्य निर्धारण, कार्य का पुनः अभिकल्पन, बढ़ी हुई कर्मचारी भागीदारी, बेहतर सांगठनिक संप्रेषण, कर्मचारी विश्राम और कारपोरेट स्वास्थ्य कार्यक्रम शामिल है। कुछ कार्य अन्य की अपेक्षा अधिक दबावपूर्ण होते हैं, परन्तु जैसे कि हमने देखा है, दबावकारी स्थितियों में भिन्न-भिन्न लोग भिन्न प्रत्युत्तर देते हैं। हम जानते है कि कम अनुभव अथवा नियंत्रण के बाह्य लोकस वाले व्यक्ति अधिक दबाव प्रवण होते हैं। चयन और स्थानन निर्णयों में इन तथ्यों को ध्यान में रखा जाना चाहिए स्पष्ट है कि प्रबंधन को भर्ती को आंतरिक लोकस वाले अनुभवी व्यक्तियों तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए, परन्तु ऐसे व्यक्ति उच्च दबाव वाले जॉब में अधिक प्रभावी रूप में अनुकूलित हो सकते हैं। इसी तरह, प्रशिक्षण से व्यक्तियों की स्वयं की प्रभाविता बढ़ सकती है और इस लिए कार्य का तनाव कम कर सकती है। जब व्यक्तियों को सुस्पष्ट व चुनौतीपूर्ण लक्ष्य मिलते हैं और इन लक्ष्यों की ओर उनकी प्रगति के बारे में प्रतिपुष्टि प्राप्त होती है, तो उनका प्रदर्शन बेहतर होता है। लक्ष्य दबाव में कमी ला सकते हैं और अभिप्रेरणा भी प्रदान कर सकते हैं। अपने लक्ष्यों के प्रति अत्यधिक समर्पित और अपने कार्य को उद्देश्य पूर्ण मानने वाले कर्मचारियों को कम दबाव अनुभव होता है क्योंकि इसकी अधिक आशा है कि वे दबाव को बाधा मानने के स्थान पर उसे एक चुनौती मानें। ऐसे सुस्पष्ट लक्ष्य प्रदर्शन अपेक्षाओं को स्पष्ट करते हैं जिनके प्राप्त होने का बोध होता है। इसके अतिरिक्त, लक्ष्य प्रतिपुष्टि वास्तविक कार्य प्रदर्शन संबंधी अनिश्चिताओं को कम करती है। परिणाम स्वरूप कर्मचारी हताशा, भूमिका अनेकार्थता और दबाव कम होगा। कर्मचारियों को अधिक दायित्व, अधिक सार्थक कार्य देने, अधिक स्वायत्तता और अधिक प्रतिपुष्टि देने के लिए कार्य को पुनः अभिकल्पित कर दबाव को घटाया जा सकता है क्योंकि ये घटक कर्मचारियों को कार्य गतिविधियों पर अधिक नियंत्रण देंगे और दूसरों पर निर्भरता में कमी करेंगे।