दिये गए गद्यांश को पढ़ें और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दें:
सामाजिक बहिष्कार एक बहु - आयामी अवधारणा है जो सम्पूर्ण देश में विविध रूपों में अस्तित्त्ववान आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक - सामाजिक कमियों के विभिन्न पहलुओं को समाविष्ट करने की धारणा है इसके सत्व के लिए खुले हुए; यह शब्द, उन समूहों जो आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से बहिष्कृत समूहों पर ध्यान केंद्रित करता है और साथ ही यह शब्द सामाजिक रूप से बाहरी लोगों को उनकी स्थिति से बाहर निकालने का कार्य करने वाले तन्त्र पर ध्यान केंद्रित करता है फ्राँस के समाज शास्त्रियों के लेखों में मुख्य रूप उद्भुत यह अवधारणा पश्चिमी यूरोप में बढ़ते हुए रूप में विद्वानों का ध्यान प्राप्त कर रही है इस शब्द की उत्पत्ति, वास्तव में मुख्य तकनीकी बदलाव और आर्थिक पुनर्संरचना के चलते उत्तर - आद्योगिक समाज में सामाजिक कमी के बदलते स्वरूप को पुर्नअवधारणा बनाने के एक प्रयास को प्रदर्शित करती है उदाहरण के लिए पश्चिम सामाजिक विखण्डन की एक घनीभूत होती प्रक्रिया का अनुभव कर रहा है जो इसलिए हो रहा है क्योंकि वहां लंबे समय की बेरोजगारी, बढ़ता अप्रवासन और कल्याणकारी राज्य से पीछे हटने की गतिविधियाँ पायी जा रही है फलस्वरूप नये सुभेद्य सामाजिक समूहों का उद्भव हो रहा है और वे दूसरों के बीच में विभिन्न रूप में जाने जाते हैं; 'नव औद्योगिक गरीब', 'अप्रवासी', 'नृजातीय समूह', 'एकल अभिभावक' पश्चिम में नयी सामाजिक समस्याओं के वृद्धि के संबंध में सामाजिक बहिष्कार में रूचि बढ़ गयी है यहाँ दो महत्त्वपूर्ण मुद्दे मूल्यवान विचार के हैं प्रथम क्या अवधारणा में नया शामिल होता है जो विश्लेषण द्वारा गरीबी, असमानता, वंचन इत्यादि के जैसे अधिक परंपरागत फ्रेमवर्क के तहत नहीं प्रदान किया जा सकता दूसरा और अधिक महत्त्वपूर्ण, कि क्या इस अवधारणा का यूरोपीय परिप्रेक्ष्य से विकास्र व्यवस्था (सेटिंग) के अतिरिक्त विस्तारित किया जा सकेगा? क्या यह उत्तर की तरफ से दक्षिण की तरफ जा सकेगा, एक ऐसी स्थिति जिसमें बहुसंख्यक लोग धनी हों से एक ऐसी स्थिति जिसमें बहुसंख्यक लोग गरीब हो? स्पष्ट रूप से गरीबी, असमानता, वंचन हकदारी और क्षमताओं वाले संबंधित मुद्दों पर विकास विश्लेषण में व्यापक रूप से ध्यान दिया गया है