निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके बाद प्रश्न का उत्तर दीजिए :
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की यह घोषणा कि पूरा अफ्रीका वाइल्ड पोलियो वायरस से मुक्त हो गया है, अनेक दर्शकों से चली आ रही इस बीमारी के विरुद्ध वैश्विक लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। विश्व स्वास्थ्य निकाय ने इसे सही रूप में 'ऐतिहासिक' कहा है क्योंकि 2012 में इस महाद्वीप में विश्व के कुल पोलियों मामलों की आधी संख्या थी। टीकाकरण के लम्बे कार्यक्रम और निगरानी के बाद अब यह घोषित किया गया है की अफ्रीका के सभी 47 देशों में पोलियो का उन्मूलन हो गया है। चार वर्ष बीत गए, तब से किसी भी देश में पोलियो का कोई मामला सामने नहीं आया है। चार वर्ष पहले उत्तरी-पूर्वी कोरियो में इसका अंतिम मामला सामने आया था। यह उपलब्धि तब और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब विश्व एक वायरस की चपेट में है, जो लोगों, सरकारों, स्वास्थ्य निकायों और चिकित्सा बिरादरी को चुनौती दे रहा है।
पोलियो के खिलाफ अभियान अफ्रीका में सफलता के साथ अपने अंत के करीब हो सकता है। केवल दो देश जहां वायरल रोग अभी भी मौजूद है और एक जीवित खतरा है, वे पाकिस्तान और अफगानिस्तान हैं। पोलियो का कोई इलाज नहीं है जो ज्यादातर बच्चों में अपरिवर्तनीय पक्षाघात का कारण बनता है और हजारों लोग इससे पीड़ित हैं। टीकाकरण से ही बचाव होता है।
विश्वव्यापी अभियान 1988 में शुरू हुआ जब WHO और UNICEF दुनिया भर में टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करने के लिए एक साथ आए। इस कार्यक्रम पर करीब 19 अरब डॉलर खर्च किए जाने का अनुमान है। चुनौतियां कई थीं। दुनिया के हर बच्चे तक पहुंचना और टीकाकरण करना था, और उसके लिए मानव प्रयास और आवश्यक रसद अभूतपूर्व पैमाने पर थी। खानाबदोश समुदायों तक वैक्सीन कैसे पहुंचाई जाए, जैसी भौगोलिक और जलवायु संबंधी चुनौतियां और कठिनाइयां थीं। एक और समस्या यह थी कि दुष्प्रचार और अफवाहें यह थी कि टीके से बांझपन या एचआईवी फैल जाएगा। यह अभी भी पाकिस्तान और अफगानिस्तान में एक गंभीर समस्या है। भारत, जहाँ कभी दुनिया में सबसे अधिक केस थे, को मार्च 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया गया था।