निम्नांकित गद्यांश को पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
बढ़ती वैश्विक अंतर्सबद्धता के दृष्टिगत, समकालीन वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्वक नागरिकता की शिक्षा प्रदान की जाएगी ताकि अधिगमकर्ता की वैश्विक मुद्दों के प्रति जागरूकता और बोध सशक्त हो और वह अधिक शांतितिपूर्ण, समावेशी, सुरक्षित और संधारणीय समाजों का सक्रिय संवर्द्धक बन सके। समग्र शिक्षा के अंग के रूप में, समस्त उच्च शिक्षा संस्थानों के विद्यार्थियों को स्थानीय उद्योग, व्यवसाय, कलाकारो, शिल्पियों आदि के साथ प्रशिक्षुता के अवसर के साथ-साथ उनके अपने अथवा अन्य उच्च शिक्षा संस्थानाों/अनुसंधान संस्थानों के संकाय और अनुसंधानकर्ताओं के साथ अनुसंधान प्रशिक्षुता के अवसर प्रदान किए जाएंगे ताकि विद्यार्थी अपने अधिगम के व्यावहारिक पक्ष के साथ सक्रियतापूर्वक जुड़ सके और इसके सह-परिणामस्वरूप उनकी नियोजनीयता में भी वृद्धि हो भारत को वैश्विक अध्ययन के एक ऐसे गंतव्य के रूप में संवर्द्धित किया जाएगा जहाँ कम लागत पर स्तरीय शिक्षा उपलब्ध हो ताकि विश्व गुरु का गौरव पुनः प्राप्त करने मे सहायक हो सके। विदेशी विद्यार्थियों को दाखिला देने वाले प्रत्येक उच्च संस्थान में अंतराष्ट्रिय विद्यार्थी कार्यालय स्थापित किया जाएगा ताकि विदेश से आ रहे विद्यार्थियों की सुविधा और सहायता सबंधी सभी मामलाों में समन्वय किया जा सके। उच्चस्तरीय विदेशी संस्थान के साथ अनुसंधान प्रशिक्षण सहयोग और संकाय/विद्यार्थी आदान-प्रदान किया जाएगा तथा अन्य देशों के साथ परस्पर लाभकारी और प्रासंगिक समझौता-ज्ञापनों पर हरस्ताक्षर किए जाएंगे। एतदर्थ बेहतर निष्पादन वाले भारतीय विश्व विद्यालयों को अन्य देशो में अपने परिसर स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा और इसी प्रकार, विश्व के 100 शीर्ष विश्वविद्यालयों मे से चयनित विश्व विद्यालयों को भारत में प्रवर्तन की सुविधा प्रदान की जाएगी। इस प्रकार के प्रवेश को सुगम बनाने के लिए एक विधान पुनःस्थापित किया जाएगा और भारत के अन्य स्वायत्त संस्थानों के सदृश इन विश्वविद्यालयों के लिए भी विनियामक, प्रशासन संरचना, और पाठ्य-सामग्री विषयक मानदण्डों के मामले शीघ्रता से निपटाए जाएंगे। साध ही, भारतीय संस्थानों और वैश्विक संस्थानों के बीच अनुसंधान सहयोग और विद्यार्थियों के मेल-जोल को प्रोत्साहित करने हेतु विशेष प्रयास किए जाएंगे। विदेशी विश्वविद्यालयों से अर्जित अंको (क्रेडिट) के यथेष्ठ पाए जाने पर यह मान्यता दी जाएगी जो उपाधि प्रदान करने वाले प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान की आवश्यकतानुसार होगी।