निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सम्बंधित पांच प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
रूढ़ धारणाएँ' जटिल आँकड़ों के सामूहिक व्यवस्था का एक स्वरुप है, जिसे हम संसार से प्राप्त करते हैं और जो केवल एक विशेष स्वरूप का होता है। ये समाज के लोगों का प्रतिनिधित्व और वर्गीकरण करते हैं। ये सामान्य लक्षणों, प्रतिरूपों और प्रतिकीकरणों के माध्यम से उस समाज के बारे में भी धारणा बनाते हैं। जब तक कि कोई मानता है कि संसार में निश्चित रूप से कोई वास्तविक क्रमिकता विद्यमान है जो मानव के समक्ष पारदर्शी रूप से उद्घाटित होती है और उसकी संस्कृति में ही बिना किसी कठिनाई के व्यक्त की जाती है। क्रमिकता की यह गतिविधि जिसमें रूढ़ धारणाओं का उपयोग शामिल है, अनिवार्यता बन जाती है। वास्तव में यह अपरिहार्य है। यह उस प्रविधि का भाग है, जिससे समाज अपने बारे में धारणा का निर्माण करता है और इस प्रकार अपने को निर्मित एवं पुर्ननिर्मित करता है। ऐसी सभी व्यवस्थाएँ आंशिक और सीमित है: परन्तु इसका अर्थ यह नहीं कि ये असत्य है। आंशिक ज्ञान असत्य ज्ञान नहीं होता है। सामान्यतः यह पूर्ण ज्ञान भी नहीं होता है। तथापि, इस परिपेक्ष में रूढ़ धारणाओं के बारे में दो समस्याएँ हैं। पहली है वास्तविकता संबंधी अवरोधक भ्रांति। इसमें किसी विशेष व्यवस्था की पूर्णता संबंधी मान्यता शामिल है। यह इसकी सीमाओं और आंशिकताओं तथा इसकी सापेक्षता और परिवर्तनीयता को मानने से इन्कार है। दूसरी समस्या यह है कि यह न केवल इतिहास की उत्पत्ति है, बल्कि यह उस समाज के अंतर्गत शक्ति संबंधों को भी प्रदर्शित करता है। रूढ़ धारणाएँ, शक्तिशाली वर्ग द्वारा समाज में अधिरोपित की जाती हैं और यह व्यवस्था सामाजिक शक्ति में सन्निहित हो जाती है। रूढ़ धारणाओं को पश्चिमी मान्यता के अंतर्गत सरल उपाय माना गया है जिसका अभिप्राय उस विधि से है जिसके माध्यम से रूढ़ धारणाएँ प्रतिनिधित्व के सरल, ध्यानाकर्षक और अवबोधक स्वरुप की होती हैं। फिर भी, ऐसी मान्यता अधिकांशतः जटिल सूचना और अभिप्राय को स्पष्ट रूप से संधारित करने में असमर्थ होती है। प्रायः रूढ़ धारणाओं की दिखाई देने वाली सरलता भ्रामक होती है।
यह गद्यांश किसे वर्णित करने का प्रयास करता है?