गद्यांश को सावधानीपूर्वक पढ़िए और उसके बाद दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
20 वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में कक्षा अनुशासन का मुख्य बल इस बात पर होता था कि विद्यार्थी के दुर्व्यवहार के प्रति कैसी प्रतिक्रिया दी जाए। इस अवधि के दौरान कक्षा प्रबंधन में मानवतावादी और प्रायोगिक व्यवहार विश्लेषण उपागमों में समानता की अवधारणा पर जोर दिया गया। ये दोनों परंपराएं प्राथमिक रूप से, कक्षा प्रबंधन की निवारक प्रणाली होने के बजाय प्रतिक्रियावादी प्रणालियां हैं। यह कि ये प्रणालियां दुर्व्यवहार की घटना घटित होने के पहले नहीं बल्कि उसके बाद समाधान मुहैया कराने का प्रयास करती हैं। हालाँकि, बिल्कुल हाल में हुए शोध में कक्षा प्रबंधन के लिए एक अन्य उपागम मुहैया कराया गया है जो कक्षा व्यवस्था और अनुशासन का प्रश्न प्रतिक्रिया के रूप में नहीं बल्कि निवारण के रूप में रूप में तैयार करता है। यह उपागम कक्षा संबंधी इस शोध पर आधारित है कि दुर्व्यवहार को रोकने हेतु प्रभावी शिक्षक क्या तरीका अपनाते है और अपेक्षाकृत कम प्रभावी शिक्षक क्या तरीका अपनाते हैं। इस शोध के कतिपय चरणों में अध्यापन के दौरान अनुभवी और अनुभवहीन दोनों प्रकार के शिक्षकों का अवलोकन और विश्लेषण करने का कार्य शामिल किया गया। इस शोध का प्रमुख निष्कर्ष यह था कि अधिक प्रभावी कक्षा प्रबंधकों और कम प्रभावी कक्षा प्रबंधकों के बीच भेद इस आधार पर किया जा सकता है कि वे दुर्व्यवहार के प्रति प्रतिक्रिया करने के बजाय दुर्व्यवहार को रोकने के लिए क्या उपाय करते हैं। एक अध्ययन में 27 स्तरहीन शिक्षकों को एक वर्ष के अवलोकन-अध्ययन हेतु भर्ती किया गया। प्रथम तीन समाह के दौरान प्रत्येक शिक्षक के बारे में अनेक प्रकार की जानकारियां इकट्ठा की गईं जिनमें कक्षाकक्ष-व्यवस्था, कक्षा नियम, दुर्व्यवहार के परिणाम, अनुचित व्यवहार के प्रति प्रतिक्रिया, शिक्षकों के प्रत्युत्तर की सततता, निगरानी और पुरस्कार प्रणाली शामिल थीं। इसके अलावा, 15 मिनट के अंतरालों पर कक्षा में कार्यरत और कक्षा में कार्यविरत, विद्यार्थियों की संख्या की गणना की गई जिससे यह पता लगाया जा सके कि किस हद तक विद्यार्थियों ने शिक्षक के अध्यापन कार्य पर ध्यान दिया। वर्ष के शेष समय में और गहन अध्ययन करने हेतु इस आंकड़े के आधार पर शिक्षकों को दो समूहों में श्रेणीकृत किया गया। अधिक प्रभावी प्रबंधक और कम प्रभावी प्रबंधक। वर्ष के शेष समय में, जिन शिक्षकों को अधिक प्रभावी कक्षा प्रबंधक के रूप में श्रेणीकृत किया था उनकी कक्षाओं में काफी अधिक विद्यार्थी कार्यरत पाए गए और काफी कम संख्या में कार्य विरत विद्यार्थी देखे गए। अपेक्षाकृत अधिक प्रभावी प्रबंधकों ने स्कूल-वर्ष के प्रथम 3 सपाहों में अपने को अग्रणी शिक्षक के रूप में स्थापित किया।