निम्नलिखित गद्यांश को पढ़ें और संबंधित पाँच प्रश्नों के उत्तर दें।
मानवजाति अपने व्यवहार को सामाजिक तौर पर निर्माण करने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र नहीं है उनकी जैविकीय प्रकृति समान होती है, पूरे विश्व में प्रकृति एक समान होती है इस तथ्य को देखते हुए कि अधिकांश समकालिक मानवों की उत्पत्ति अफ्रीका के बाहर एक अपेक्षाकृत छोटे समूह के द्वारा लगभग 50 हजार वर्ष पहले हुई थी। यह परस्पर प्रकृति राजनीतिक व्यवहार को निर्धारित नहीं करती है लेकिन यह संभावित संस्थाओं की प्रकृति निर्मित और सीमित करती है। इसका तात्पर्य यह है कि समय और संस्कृतियों के क्रम में मानव राजनीति व्यवहार के कुछ विशिष्ट तरीकों से विनिर्दिष्ट होती है, इस परस्पर प्रकृति को कुछ हद तक इस तरह वर्णित किया जा सकता है कि मानवजाति समाज पूर्व स्थिति से पहले अस्तित्व में नहीं था।
यह विचार कि मानव जाति एक समय में पृथक व्यक्ति के तौर पर अस्तित्व में थी जो आपस में अराजकतापूर्ण हिंसा (हॉब्स) द्वारा या एक दूसरे से प्रशांत अज्ञानतावश मिलते थे (रूसो) ऐसा कहना सही नही है। मानवजाति और उनके पुराप्राचीन पूर्वज हमेशा आपसी संबंधों के आधार पर विभिन्न आकार के सामाजिक समूहों में रहते थे। वास्तव में वे इन सामाजिक एककों में लम्बे समय तक रहे जिससे सामाजिक सहयोग के लिए आवश्यक प्रज्ञामूलक और भावनात्मक क्षमतायें विकसित हुयीं और वे अपने जीन अक्षयनिधि से दृढ़तापूर्वक जुड़ गयीं। इसका अर्थ यह हुआ कि सामूहिक कार्य का विवेकपूर्ण-विकल्प प्रतिदर्श, जिसमें एक व्यक्ति यह समझता है कि वह आपस में सहयोग करके ही बेहतर ढंग से रह सकते हैं, बहुत हद तक सामाजिक सहयोग के महत्त्व को कमतर दिखाता है, जो मानव समाज में विद्यमान होता है और जो इसके अंतर्गत निहित इरादों को ठीक से नहीं समझता है।
अगला विचार प्राकृतिक मानवीय सामाजिकता का है। यह दो सिद्धांतों पर आधारित है जो रिश्तेदारों का चयन और परस्पर परोपकारिता पर निर्भर है। यह रिश्तेदार चयन या समावेशी अनुकूलता का सिद्धांत दर्शाता है कि मानवीय क्रिया की परोपकारिता जैनेटिक संबंधों की ओर (या ऐसे व्यक्ति जो जैनेटिक रूप से एक दूसरे से जुड़े हों) साधारण तौर पर उनके साझा जीन्स के समानुपाती होती है। परस्पर परोपकारिता का सिद्धांत यह कहता है कि मानव का स्वभाव आपसी सम्बंध स्थापित करने का है जो परस्पर लाभ या परस्पर हानि पर आधारित होता है जब वह समय के दौरान एक दूसरे से मिलते जुलते हैं। परस्पर परोपकारिता रिश्तेदार चयन के विपरीत जैनेटिक सम्बद्धता पर आधरित नहीं होता है हालांकि यह बार-बार प्रत्यक्ष व्यक्तिगत मेलजोल पर निर्भर है।