निम्नांकित गद्यांश को पढ़िए और प्रश्न के उत्तर दीजिए।
चिंतन के पश्चात् वैज्ञानिकों के बहुत से पूर्ववर्ती सिद्धांतों को अस्वीकृत किया है। यह भी सत्य है कि वे सिद्धांत जिन संदर्भों में विकसित किए गए थे और उनका परीक्षण हुआ था, उन संदर्भों के भीतर बहुत अधिक प्रभावी थे। तारे और ग्रहों की अवस्थिति के संबंध में भविष्यवाणी करने के लिए सौर मंडल का पुराना पृथ्वी केन्द्रित निदर्श बिलकुल सटीक था। यहां तक कि अब न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम का प्रयोग उपग्रह के प्रेक्षण पथ का परिकलन करने और चन्द्रमा तक जाने के लिए किया जाता है। मान्यताएं उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर बनाई जाती है। कालक्रम में दार्शनिकों और सांख्यिकी विदों ने मान्यता, कार्य और इस तथ्यात्मकता को शामिल करने वाले साक्ष्य के मध्य संबंध के बारे में चिन्तन विकसित किया है। ये मान्यताएं शनैः शनैः विकसित होती हैं और इसमें इस बात का मापन किया जाता है कि हमारे द्वारा किसी चीज को सत्य मानने की कितनी संभावना है। हमारे द्वारा एकत्र साक्ष्य का मान्यता के उन अंशों पर प्रभाव पड़ना चाहिए। साक्ष्य की प्रकृति से हममें विश्वास उत्पन्न होता है। हमारे समक्ष प्रत्यक्ष चीजाें और हमारी मान्यता के मध्य सटीक संबंध ज्ञात करने के लिए हम प्रायिकता सिद्धांत की शाखा का प्रयोग कर सकते हैं। बेएस नियम के रूप में प्रचलित सूत्र में आपको मान्यता या विश्वास की सीमा का परिकलन करने के अनुमति दी गई है। साक्ष्य को देखने से पूर्व आपकी मान्यता के संबंध में में कुछके साक्ष्य के अधिगम के पश्चात् ही विचार किया जाता है। बेएस का नियम आपकी मान्यताओं को अद्यतन करने के विशिष्ट और विवेकपूर्ण तार्किक तरीका है।