निम्नलखित उद्धरण को पढ़ें और प्रश्न के उत्तर दें:
प्रत्येक देश में अन्न की बर्बादी बहुत अधिक होती है लेकिन कुछ अध्ययनों ने यह दर्शाया है कि यह विकासशील देशों में अधिक गंभीर है। UNFAO ने अनुमान लगाया था कि कुल उत्पादित अन्न का एक तिहाई भाग बर्बाद हो रहा होगा। विश्व आवश्यक अन्न का दुगुना उत्पादन करता है लेकिन काफी संख्या में लोग बर्बादी और अन्य कारणों से इससे वंचित हो जाते हैं। अन्न खेत में बर्बाद हो जाता है जब इसे बाजार ले जाया जाता है और इसे प्रसंस्कृत किया जाता है, भंडारण किया जाता है और दुकानों में भेजा जाता है और अंततः रसोई में बर्बाद होता है। कई फल एवं सब्जियां तोड़े जाने के तुरन्त बाद नष्ट हो जाते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि उत्पादन और भंडारण पद्धति में सुधार लाया जाए, परिवहन अवसंरचना, शीत चेन पद्धतियों और प्रसंस्करण तकनीकों को उन्नत बनाया जाए। आधुनिक तकनीकों और बेहतर पैकेजिंग, पद्धतियों की आवश्यकता है। लेकिन उन दशों में भी जहाँ ये सुविधाएं उपलब्ध हैं, बर्बादी बहुत अधिक है। अतः सबसे अधिक जरूरी यह है कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि अन्न किसी भी रूप में, किसी भी अवस्था में बर्बाद न हो, आम जागरुकता बढ़ायी जाए। कुछ देशों ने अन्न की बर्बादी के विरुद्ध, क्लीन प्लेट अभियान चलाया है। अनुमान है कि कम से कम 1 लाख करोड़ रु. का अन्न भारत में बर्बाद होता है और इसमें पकाया गया अन्न शामिल नहीं है। उसका एक हिस्सा ऐसे देश में बड़ी संख्या में, भूखे लोगों को खिलाने के लिए पर्याप्त है जो विश्व क्षुधा, सूचकांक में 107 देशों में 94 वें स्थान पर है। अन्न की बर्बादी शादी एवं अन्य अवसरों पर बहुत अधिक होती है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है कि अन्न की बर्बादी को कम करने से ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन भी कम होगा एवं भूमि परिवर्तन एवं प्रदूषण के माध्यम से प्रकृति की बर्बादी की गति को भी कम करेगा। अतः अन्न की बर्बादी न करना एक राष्ट्रीय मिशन बनना चाहिये। इसका बहुत सकारात्मक पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी पड़ेगा। हम याद रखें कि विश्व के कई हिस्सों में लाखों परिवार प्रत्येक दिन भूखे रहते हैं। भारत में, घरों में अन्न की बर्बादी का अनुमान 50 कि. ग्रा. प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष है जो US और चीन की तुलना में कम है। लेकिन यह अन्न के अधिक उपयोग के कारण नहीं बल्कि समग्र उपलब्धता के कम होने के कारण हो सकता है।