कथन - “जो इन्द्रिय गुणधर्म का प्रत्यक्षीकरण करती है वही इन्द्रिय उसकी गुणधर्मिता तथा उसके अभाव का भी प्रत्यक्षीकरण करती है।'' इसे प्राचीन भारतीय दर्शन के किस सम्प्रदाय से जोड़ा जा सकता है।
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लोकयाल/कार्विका
2
न्याय
3
बौद्ध
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उत्तर मीमांसा
कथन - “जो इन्द्रिय गुणधर्म का प्रत्यक्षीकरण करती है वही इन्द्रिय उसकी गुणधर्मिता तथा उसके अभाव का भी प्रत्यक्षीकरण करती है।'' इसे प्राचीन भारतीय दर्शन के किस सम्प्रदाय से जोड़ा जा सकता है।