निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और प्रश्नों का उत्तर दीजिए:
वाल्टर लिपमैन रूढ़ चित्रण को 'दुनिया' की सोच के रूप में देखते हैं। यद्यपि वे मुख्यतः रूढ़ चित्रण के प्रतिरूपण की विधायें जिनका मुख्य विषय विश्व नहीं है, के तरीकों से पृथक करने में प्रवृत्त नहीं है, फिर भी हमारे लिए ऐसा करना विशेषकर महत्चपूर्ण है क्योंकि हमारा फोकस मीडिया फिक्शनों में निरूपित है जो सौन्दर्यपरक और सामाजिक संरचन है। इस परिप्रेक्ष्य में रूढ़ चित्रण काल्पनिक पात्रों खास प्रकार की वृहत्तर श्रेणी की विशेष उपश्रेणी है। जबकि रूढ़ चित्रण को अनिवार्यतः उपन्यास में अपने सौंदर्यपरक कार्य नामतः चरित्र चित्रण के रूप द्वारा परिभाषित किया जाता है। यह टाइप कुछ शीघ्र अभिज्ञेय और पारिभाषिक शील गुणों के माध्यम से गढ़ा गया कोई पात्र हैं जी कथा चित्रण के दौरान बदलता या विकसित' नहीं होता है और जो मानव संसार की सामान्य, आवर्ती विशेषताओं की और इशारा करते हैं। इस टाइप के विपरीत उपन्यास के ऐसे पात्र हैं जिसे ऐसे बहुविध शील गुणों द्वारा परिभाषित किया जाता है जो चरित्र के विकास पर निर्भर और बाहरी संसार को ओर अभिमुख होने के बजाए अपनी विशिष्ट वैयक्तिकता पर केन्द्रित कथा चित्रण के माध्यम से धीरे-धीरे हमारे सामने प्रकट होता है। किसी समाज में नए चरित्र जो किसी टाइप से स्पष्ट रूप में बेहतर हैं क्योंकि समाज में समाजिक वाग्मिता के स्तर पर किसी कीमत पर समूह या जनसमुदाय की तुलना में व्यक्ति का महत्व अधिक है। इस कारण से अधिकांश उपन्यासों में जिनमें सामान्य सामाजिक मुद्दों को दर्शाया गया हैं, अंततः किसी व्यक्ति विशेष की कहानी होती है। अतः सामाजिक विषयों की वापसी विशुद्ध रूप से वैयक्तिक और मनोवैज्ञानिक विषयों में ही होती है। जब हम सामाजिक श्रेणियों का निरूपण करते हैं और उन्हें परिभाषित करते हैं जैसे कि शराबियों का चित्रण करते हैं, हमें यह विचार करना पड़ता है कि चरित्र चित्रण के किसी एक रूप में अन्य की अपेक्षा क्या दाँव पर लगा है।