निम्नलिखित गदयांश को पढ़िए और प्रश्न के उत्तर दीजिए:
आइए हम इस बात पर विचार करें कि आप किसी विनाशकारी आदत चाहे वह मोटापा हो, आदतन विलम्ब करने की वृत्ति हो, अपवित्रता हो, धूम्रपान, चिड़चिड़ापन हो या शराब के सेवन की आदत हो को दूर करने के लिए क्या कर सकते हैं। सर्वप्रथम आपको यह निश्चय करना चाहिए कि आप उस आदत को छोड़ना चाहते हैं। यह ऐसा निर्णय है जो केवल आप ही ले सकते हैं। आपमें इस प्रेरणा के संचार के बिना किसी भी व्यक्ति या प्रक्रिया का कोई सार्थक प्रभाव नहीं पड़ेगा। यदि कोई अन्य
व्यक्ति “इसके बारे में आपसे बात करता है” तो इस बात की संभावना प्रबल है कि कदाचित आप सुझाए गए मार्ग को अपनाना आरंभ भी करेंगे तो यह प्रयास क्षणिक होगा। स्मरण रहे कि सामान्यतया आप किसी अन्य व्यक्ति के लक्ष्य तक नहीं पहुँचते हैं। कई बार, यदि आपने किसी ऐसी आदत का परित्याग करने का प्रयास नहीं किया होगा जिसे छोड़ने के लिए आप तैयार नहीं थे तो बहुत पीछे ही रह जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, वजन कम किया और फिर से वजन बढ़ा लिया। इसलिए सर्व
प्रथम और सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पक्ष यह है कि आप निश्चय करें कि आप अब और किसी विनाशकारी आदत के वश में नहीं रहेंगे। निर्णय लीजिए कि आप अपने जीवन पर नियंत्रण चाहते हैं, यह कि आप मुक्त होना चाहते हैं, यह कि आप अपने जीवन के साथ पूर्व में किए गए कृत्य के स्थान पर अपने जीवन में कुछ नवीन कृत्य करना चाहते हैं। किसी बुरी आदत को छोड़ना अत्यधिक कठिन है। किन्तु सौभाग्यवश, इसके नतीजे सुखानुभूतिजन्य और बहुत अधिक फलदायी हैं। पूर्व में धूम्रपान
करनेवाले, शराब पीने वाले और मोटापाग्रस्त लोगों में इस बात को लेकर मतैक्य है और वे बहुत उत्साहित स्वर में धूम्रपान त्यागने, ज़रूरत छुटने और शराब की बोतल को हाथ नहीं लगाने से होनेवाली खुशी और उत्तेजना के बारे में विस्तारपूर्वक बताते हैं। निःवर्तमान धूम्रपान करने वाले अन्य बातों के साथ-साथ भोजन के उत्तेजक स्वाद, वायु की
सुगंध, पोशाक, फर्निचर के बारे में बात करते हैं। वे किसी ऐसी आदत को त्यागने के फलस्वरूप प्राप्त आत्मसम्मान और संतोष के बारे में बात करते हैं जिसके कारण उनके जीवनकाल में दो से दस वर्ष तक का समय कम हो जाता और उनके जीवन से बहुत सी संजीवता का लोप हो जाता।
विनाशकारी आदतों का उन्मूलन किस पर निर्भर करता है: