निम्नलखित उद्धरण को पढ़ें और प्रश्न के उत्तर दें:
अमूर्त सिद्धांतीकरण की मानव क्षमता शीघ्र ही पर्यावरण संबंधी निपुणता और सामाजिक व्यवहार के विनियमन के अनेक नए नियमों की रचना करती है जो चिम्पान्जी में पाये जाने वाली किसी भी चीज के बहुत पार जाती है। विशेष रूप से मृत वंशजों, आत्माओं, देवी-देवताओं और अन्य अदृश्यमान शक्तियों से संबंधित विचार नए नियमों और उनके अनुपालन के लिए शक्तिशाली उत्प्ररेकों की रचना करता है। विभिन्न प्रकार के धार्मिक विचार उस मापक्रम को अत्यधिक ऊंचे स्तर पर पहुंचाते हैं, जिसके आधार पर मानव समाज संगठित किए जा सकते हैं और सामाजिक एकजुटता के नए रूपों का लगातार सृजन करते हैं। लेकिन नियमों के अनुपालन से संबंधित भावनाओं का अत्यंत विकसित अनुचर-वर्ग सुनिश्चित करता है कि कोई भी मानसिक प्रतिरूप यह नहीं दर्शाता कि विश्व किस प्रकार कार्य करता है, जिसे सदैव एक साधारण सिद्धांत के रूप माना जाए और उसे तब अमान्य किया जा सकता है, जब यह अवलोकित यथार्थ के अनुरूप नहीं रहता है। आधुनिक, प्राकृतिक विज्ञान के क्षेत्र में भी, जहाँ परिकल्पना के परीक्षण के स्पष्ट नियम हैं, वैज्ञानिक सिद्धांतों के प्रति भावनात्मक लगाव विकसित कर लेते हैं और यह इंगित करते हुए अनुभवजनक साक्ष्य का विरोध करते हैं कि उनके प्रिय सिद्धांत गलत हैं। अंतर्भूत गुण के साथ मानसिक प्रतिरूपों और सिद्धांतों में निवेश की प्रवृत्ति से सामाजिक स्थायित्व को प्रोत्साहन मिलता है और इससे समाज ऊंचा आकार ग्रहण करता है। लेकिन, इसका अर्थ यह भी है कि समाज अत्यधिक रूढ़िवादी होते हैं और उनके प्रबल विचारों को चुनौती का विरोध करते हैं। यह धार्मिक विचारों के मामले में सर्वाधिक स्पष्ट है, लेकिन धर्म-निरपेक्ष नियम भी परम्परा, अनुष्ठान और रीति-रिवाजों के शीर्षकों के अंतर्गत अत्यधिक भावना के साथ निवेशित रहने की प्रवृत्ति रखते हैं। तब, नियमों के संबंध में समाजों का रूढ़िवाद राजनीतिक क्षरण का एक स्रोत होता है। पर्यावरणीय परिस्थितयों के एक समुच्चय की अनुक्रिया में बनाए गए नियम या संस्थाएं बाद की स्थितियों में निष्क्रिय हो जाती हैं लेकिन उनमें लोगों के भारी भावनात्मक निवेश के कारण उनको बदला नहीं जा सकता। इसका अर्थ यह है कि सामाजिक परिवर्तन प्रायः रैखिक-यानि बदलती स्थितियों के साथ एक निरंतर लघु समायोजनों की प्रक्रिया-नहीं होते, बजाय इसके एक लम्बी गतिहीनता के पैटर्न का अनुसरण करता है जिसके बाद विपत्तिकारी परिवर्तन होता है।
इससे स्पष्ट होता है कि हिंसा राजनीतिक विकास की प्रक्रिया के लिए इतनी केन्द्रीय-बिंदु क्यों है। जैसाकि हॉब्स ने इंगित किया है, हिंसक मौत का भय लाभ या आर्थिक प्रेरणा की आकांक्षा से एक अत्यंत भिन्न भाव है। किसी भी व्यक्ति या प्रियजन के जीवन पर मूल्य टैग लगाना अत्यधिक कठिन है, इसी कारण भय और असुरक्षा विशिष्ट रूप से उन चीजों को करने की प्रेरणा देती है, जो केवल भौतिक स्व-हित नहीं दे सकता।
अंतर्भूत मूल्य के मानसिक प्रतिरूपों में निवेश करने की प्रवृत्ति इनमें से किसको संवर्धित करती है?
(A) सामाजिक नियत्रंण का विरोध
(B) सामाजिक स्थायित्व
(C) प्रबल विचारों का संरक्षण
(D) समाज का धर्म-निरपेक्षीकरण
सही विकल्प चुनिए: