निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
भारतीय राज्य के निर्माण की कहानी इसके अभिजात्य वर्ग के निर्माण की कहानी के समानांतर चलती है। भारतीय स्वतंत्रता में राज्य को उपकरणवादी अवधारणा से प्रेरित आधुनिकीकरण का एजेंडा स्थापित करने में अभिजात्य वर्ग की शक्तिशाली भूमिका महत्वपूर्ण है। अभिजात्य वर्ग का स्वतंत्र भारत के उभरते राष्ट्रीय पटल पर भारतीय समाज में आधुनिकता लाने वाली सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रियाओं को प्रारंभ करने वालों के रूप में हुआ। अभिजात्य वर्ग में न केवल राजनीतिक सत्ता के दलाल और निजी हित साधने वाले लोग शामिल थे, बल्कि अंग्रेजी माध्यम में शिक्षित और निजी, सरकारी और सिविल सोसायटी क्षेत्रों में नियुक्त मध्यम वर्ग भी शामिल था। आधुनिक राज्य की प्रजा के रूप में उभरते पेशेवर मध्यम वर्ग के पास अत्याधिक शक्ति थी और मुख्यतया अंग्रेजी भाषा की शिक्षा और निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों में रोजगार के अवसर इस वर्ग के लिए सुलभ थे। एक और राज्य ने अपने तंत्रों को चलाने के लिए विस्तृत नौकरशाही विकसित की, तो दूसरी ओर धीरे-धीरे बाजार विकसित किया जिससे मध्यम वर्गों के लिए रोजगार के अवसर सृजित हुए और भारत की मिश्रित अर्थव्यवस्था में मध्यम वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित हुई। भारतीय अर्थव्यवस्था और इसकी कल्पना को साकार करने में मध्यम वर्गों की सहभागिता एक ऐसी प्रमुख विशेषता है जो बौद्धिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण है। इस मायने में भारतीय राज्य की सफलता आंतरिक रूप से स्वतंत्र भारत की कल्पना के नए रूप से जुड़ी है जिसने एक और राष्ट्रीय राज्य के विमर्श को स्थापित किया, तो दूसरी ओर सहभागिता स्थल के रूप में बाजार को सक्रिय किया।