निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और दिए गए प्रश्न का उत्तर दीजिए।
लोकतंत्र और शांति के बीच संबंध इस तथ्य की उपज हो सकता है कि लोकतंत्र तथा शांति समान ध्येय साझा करते हैं। ये समान ध्येय क्या हो सकता है? एक संभावना आर्थिक विकास है। उन राज्यों में लोकतंत्र के अभ्युदय और जीवित रहने की मूलभूत प्रवृत्ति होती है, जो अपेक्षाकृत धनाढ्य है, जबकि उसके विपरीत अधिक गरीब देशों में लोकतांत्रिक संस्थानों के भंग होने की अधिक संभावना रहती है। यद्यपि देशों के बीच शांति को बढ़ावा देने के लिए धन-दौलत एकमात्र सामान्य प्रवृत्ति नहीं होती, फिर भी इसका साक्ष्य है कि मुक्त बाजारोन्मुखी अर्थव्यवस्थाओं बाले देशों के बीच पूंजीवादी शांति के साथ संगति है। अन्य संभावना यह है कि शांति लोकतंत्र उत्पन्न करती है और लोकतंत्र के उन क्षेत्रों में अभ्युदय की अधिक संभावना है, जिन देशों के एक-दूसरे के साथ शांतिपूर्ण संबंध हैं। एक धमकी भरे अन्तर्राष्ट्रीय वातावरण और राज्य के भू-भागीय क्षेत्र के प्रति खतरे केन्द्र सरकार और सेना को सशक्त करने की ओर प्रवृत करते हैं, जिससे लोकतंत्र की जड़ें जमाना कठिन होता है। इस प्रकार, राज्यों द्वारा उनके पड़ोसियों के साथ शेष प्रतिद्वन्द्वितायें और भू-भागीय विवादों को सुलझाने के बाद ही लोकतंत्र के अभ्युदय की अधिक संभावना है।
यदि ऐसा है तो यह शांतिपूर्ण सीमाए हैं, जो लोकतंत्र को संभव बनाती हैं विलोमतः नहीं।
अंततः यह तर्क दिया गया है कि लोकतांत्रिक शांति वास्तव में साझा रणनीतिक हितों का एक उत्पाद है, जिसका उनकी लोकतांत्रिक संस्थानों के साथ कोई संबंध नहीं है। उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम काल से प्रमुख लोकतांत्रिक देश समान खतरों के विरूद्ध एकजुट थे। इस प्रकार के समान हितों ने लोकतांत्रिक देशों के बीच संघर्ष के अवसरों को घटाया। इसने उन सघर्षों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का एक मजबूत उत्प्रेरक प्रदान किया, जो उठे थे।