गद्यांश को सावधानीपूर्वक पढ़े तथा इसके बाद दिए गए प्रश्नों का उत्तर दें।
सामान्य अर्थ में लोक क्रिया आर्थिक विकास में तया समष्टि रूप से लोगों तक सामाजिक अवसर पहुंचाने में केंद्रीय भूमिका निभा सकता है। कभी-कभी अर्थशास्त्र से सम्बन्धित साहित्य में लोक क्रिया का लक्षण-वर्णन सरकार द्वारा की गई क्रिया, न कि स्वयं जनता द्वारा की गई क्रिया के रूप में किया जाता है। यह व्याख्या गंभीर रूप से भ्रामक हो सकती है क्योंकि यह हमारा ध्यान सरकार की क्रिया की दिशा के निर्धारण में जनता के प्रभाव से दूर ले जाती है। सामान्यतः आर्थिक तथा सामाजिक परिवर्तन की सफलता तथा विफलता तथा विशेष रूप से विकास प्रयासों में जनता की क्रिया का विशद महत्व हो सकता है। सरकार के सकारात्मक कार्यों को बढ़ावा देने में सरकार की नीति को प्रभावित करने में लोक सक्रियतावाद विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। इन सकारात्मक कार्यों में सार्वजनिक सेवाएं यथा स्वास्थ्य देखरेख, बाल टीकाकरण, प्राथमिक शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, पर्यावरण की सुरक्षा तथा ग्रामीण अवसंरचना शामिल होती हैं। जनता की सतर्कता तथा उसका शामिल होना न केवल इन आवश्यक सेवाओं के पर्याप्त विस्तार को सुनिश्चित करने में बल्कि उनके कार्य की निगरानी में भी काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। सचमुच अपेक्षित सेवाओं की वास्तविक पहुंच तथा प्रभावी गुणवत्ता सिद्धांत रूप में काफी हद तक स्थानीय समुदाय द्वारा एकत्र की गई जानकारी तथा उसकी बातें सुनी जायें, इस संबंध में उसकी क्षमता की सीमा पर निर्भर करती है। उदाहरणार्थ गांव में शिक्षकों के काम से जी चुराने तथा कक्षा से अनुपस्थित रहने की स्थिति का अवलोकन सरकारी निरीक्षकों की तुलना में स्वयं ग्रामीणों द्वारा आसानी से किया जा सकता है और स्थानीय सक्रियतावाद से इसके समाधान अधिक प्रभावी ढंग से ढूँढ़े जा सकते है। इसके अतिरिक्त, विद्यालयो, अस्पतालों तया अन्य सुविधाओं को सार्वजनिक आवश्यकताओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनाया जा सकता है यदि इस दिशा में ऊपर से नहीं, बल्कि स्थानीय जनता का दबाव हो।