निम्नलिखित गद्यांश को पढ़ें और प्रश्न के उत्तर दीजिए।
हमें प्रारम्भ में पुनः स्मरण करना चाहिए कि किसने ऐतिहासिक उपनिवेशवाद को प्रभेदक बनाया। उपनिवेशवाद आर्थिक और सामाजिक संगठन का एक रूप था, जिस पर ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन और बाद में अमेरिका जैसी औपनिवेशिक शक्तियों का वर्चस्व रहा। बीसवीं सदी के अंतिम काल में उपनिवेशवाद-विरोधी आंदोलनों के कारण यह अब आमतौर पर ऐतिहासिक रूप से समाप्त माना जाता है, यद्यपि राजनीति और अन्य क्षेत्रों में शक्ति के नव-उपनिवेशिक रूप जारी हैं । यह अब अधिक पुराने उपनिवेशवाद से उपनिवेशवाद के नए रूप-डेटा उपनिवेशवाद (दत्त उपनिवेशवाद) के तौर पर निरंतरता है । ऐतिहासिक उपनिवेशवाद के चार प्रमुख घटक थे - संसाधनों का विनियोग; अत्याधिक असमान सामाजिक एवं आर्थिक संबंधों का उद्विकास, जिसमें दासता और बलात् श्रम के अन्य रूपों के अतिरिक्त असमान व्यापार संबंध, संसाधन विनियोग के लाभों का एक अत्यधिक रूप से असमान वैश्विक वितरण; और इस सबका बोध कराने वाली विचारधाराओं का प्रसार शामिल थे । उदाहरणार्थ, प्राकतिक संसाधनों को निर्मुक्त करने के रूप में औपनिवेशिक विनियोग की पुनर्रचना, निकृष्ट लोगों की सरकार और विश्व में सभ्यता लाने की पुनर्रचना । हम डेटा-उपनिवेशवाद के रूप में वर्तमान में हो रहे रूपांतरणों के वर्णन के लिए 'उपनिवेशवाद' शब्द का प्रयोग इसलिए नहीं कर रहे क्योंकि हमें एक रूपक की तलाश है, बल्कि यह मानव इतिहास के भीतर और विशेष रूप से पूंजीवाद के भीतर संरचनात्मक चरणों को प्रग्रहित करता है । उपनिवेशवाद इस बात का मानक निर्वचन नहीं रहा है कि समकालीन पूंजीवाद में क्या परिवर्तन हो रहा है । फिर भी, यह अधिकाधिक रूप से स्पष्ट होता जा रहा है कि पूंजीवाद की वर्तमान संवृद्धि को सदैव अधिक महत्वाकांक्षी व्यावसायिक समाकलन या श्रमिकों के सदैव बढ़ते हुये शोषण के अर्थ में प्रगहित नहीं किया जा सकता है।