"पण्यकरण की क्रियाविधि में ऐसे मंच शामिल हैं जो ऑन लाइन और ऑफलाइन वस्तुओं, गतिविधियों, भावनाओं और विचारों को व्यापार योग्य पण्यों में रुपांतरित करते हैं। इन पण्यों का चार भिन्न प्रकार की मुद्रा से मूल्य निकाला जाता है : ध्यान, डाटा, प्रयोक्ता और धन। पण्यकरण डाटा-करण की क्रियाविधि से घनीभूत हो जाता है क्योंकि ऑनलाइन मंचो द्वारा भारी मात्रा में प्रयोक्ता डाटा एकत्र और संसाधित किया जाता है। यह समय विशेष पर प्रयोक्ताओं की रुचियों, वरीयताओं और अवश्यकताओं में अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। यह चयन की क्रियाविधि में भी बांधता है क्योंकि ये प्रयोक्ता वैयक्तिकिकृत सेवाओं और विज्ञापनों से जुड़े हुए हैं।
पण्यकरण में एकल मंचों के व्यापारिक मॉडल शामिल हैं लेकिन यह इनके समान नहीं है। इसके बजाए यह क्रियाविधि मंचीय परिवेश के माध्यम से सृजित बहुपक्षीय बाजार में सक्रिय होती है जो आधारभूत संरचना के कोर को क्षेत्रीय मंचों के साथ जोड़ता है।
पण्यकरण क्रियाविधि प्रयोक्ता को एक साथ सशक्त और अशक्त कर रही हैं। योजक मंच व्यक्तिगत प्रयोक्ताओं को अपनी वैयक्तिक आस्तियों अथवा अनुभवों को ऑनलाइन - चाहे यह उनका अपार्टमेंट हो, यात्रा हो, आँखों-देखी रिपोर्ट हो अथवा विडिओ-विपणन करने की अनुमति देते हैं। ये प्रयोक्ता गतिविधियों को पण्य बनाने में सहायता करते हैं जिससे प्रयोक्ता स्वयं में उद्यमी बन सकें। दूसरी ओर, पण्यकरण की इन्ही मंचीय क्रियाविधियों में सांस्कृतिक श्रम, प्रयोक्ताओं के श्रम और मांग-पर सेवा कर्मियों का शोषण अंतर्विष्ट है। और फिर इन क्रियाविधियों से आर्थिक सत्ता चंद मंच स्वामियों और प्रचालकों के हाथों में केन्द्रित हो जाती है जो संकलनकर्ता और द्वारपाल मध्यस्थों के रुप में कार्य करते हैं।