निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और प्रश्न का उत्तर दीजिए -
जब कुछ राष्ट्रीय उत्पादक अपने उत्पादित वस्तुओं के विरूपित व्यापार के संबंध में शिकायत करते हैं, तब जाकर व्यापार नीति जन-चेतना एवं मीडिया तक प्रतीकात्मक रूप से पहुँचती है। अधिकांशतः उत्पादक चिंतित रहते हैं, क्योंकि आयातित वस्तुओं के कारण उनके लाभों में कमी आती है अथवा उन्हें अपने रोजगार से हाथ-धोना पड़ता है।
अन्य उत्पादक भी शिकायत कर सकते हैं कि उनकी वस्तुओं पर विदेशी अवरोधों के कारण उन्हें बाहर के बाजारों से दूर रखा जाता है और अपने स्थान पर रोजगार से वंचित होना पड़ता है। घरेलू व्यापार नीति को समझने के लिए हमें विचाराधीन हितों को समझने तथा उन संस्थाओं के बारे में जानने की आवश्यकता है जिनके माध्यम से इन हितों को व्यक्त किया जाता है और किस प्रकार प्रतिस्पर्धी हित आपस में एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। व्यापार-अवरोधों के लाभ एवं हानि दोनों होते हैं। वास्तव में, व्यापार संरक्षण के सभी यंत्र यथा-प्रशुल्क, कोटा एवं अन्य प्रतिषिद्धियाँ आयात को और अधिक महंगी बनाती हैं, जिससे घरेलू उत्पादकों को अपने उत्पादों को अधिक बेचने और मूल्यों को बढ़ाने अथवा दोनों प्रकार सुविधा प्राप्त हो जाती है। जब युनाइटेड स्टेट्स में आयात किए गए विदेशी इस्पात पर अधिक प्रशुल्क अधिरोपित की जाती है तो अमेरिकी इस्पात उत्पादक उच्च मूल्यों पर विक्रय को बढ़ा सकते हैं। परिणामस्वरूप वे अपने लाभों में वृद्धि कर सकते हैं, मजदूरी बढ़ा सकते हैं और अधिक कामगारों को नियोजित कर सकते हैं। कोटा (नियतांश), जो राष्ट्रीय बाजार में बेची गई विदेशी वस्तुओं की मात्रा को सीमित करता है और अंततः उस पर समान प्रभाव पड़ता है जैसे कि आयात में कमी से आपूर्ति में कमी आती है और इस प्रकार मूल्य में वृद्धि होती हैं। अतः व्यापार अवरोधों से राष्ट्रीय उत्पादकों को सहायता मिलती है। संरक्षण का सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव संरक्षित वस्तु के उपभोक्ताओं पर पड़ता है। उत्पादकों को लाभ मिलता है तथा उपभोक्ता को संरक्षण से हानि होती है। व्यापार अवरोध आर्थिक अक्षमताओं को पुनःस्थापित करता है। इससे उपभोक्ता, उन वस्तुओं का उपभोग कम कर देता है, जो संरक्षण के कारण कृत्रिम रूप से महंगे हो जाते हैं।