निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और प्रश्न संख्या के उत्तर दीजिए-
स्वेच्छातंत्रीय पितृसत्तावाद (लिबर्टेरियन पैटर्नलिज्म) एक नया आन्दोलन है जो बहुत आकर्षक नहीं है। दोनों शब्दों की अभिलाक्षणिकताएँ लोकप्रिय संस्कृति और राजनीति के रूढ़प्ररूपों से युक्त हैं जो उन्हें बहुत सारे लोगों के लिए अनाकर्षक बना देती हैं। इससे भी बुरी बात यह है कि ये धारणाएँ अन्तर्विरोधी प्रतीत होती हैं। यदि ये पारिभाषिक शब्द उचित ढंग से समझे जायें, तो दोनों धारणाएँ सामान्य-बोध को दर्शाती हैं। अकेले के बजाय दोनों संयुक्त रूप से कहीं अधिक आकर्षक हैं। स्वेच्छातंत्रीय रणनीति के अनुसार, लोग जो पसन्द करें वह करने के लिए वे स्वतन्त्र होने चाहिए। यदि वे ऐसा करना चाहें तो यह अवांछनीय व्यवस्थाओं से बाहर रहने का चुनाव करना भी है। स्वेच्छातंत्रीय पितृसत्तावादी यह आग्रह करते हैं कि लोग चुनने के लिए स्वतन्त्र होने चाहिए। नीतियाँ इस तरह अभिकल्पित की जाती हैं जिससे चयन की स्वतंत्रता या तो यथावत् रहे या उसमें वृद्धि हो। पितृसत्तावादी पक्ष इस दावे में निहित है कि लोगों का व्यवहार प्रभावित करने के लिए चयन रचनाकारों के प्रयास वैध हैं। इसका उद्देश्य लोगों का जीवन दीर्घतर, अधिक स्वस्थ और बेहतर बनाना है। निजी क्षेत्र में, और सरकारी क्षेत्र में भी, संस्थानों को लोगों का चयन संचालित करने के लिए सचेत प्रयास करने चाहिए ताकि लोगों का जीवन समुन्नत हो। कोई नीति पितृसत्तावादी है यदि वह लोगों के अपने निर्णय की दृष्टि में उनका जीवन समुन्नत बनाने के लिए चयनकर्ताओं के चयन को प्रभावित करने का प्रयास करती है। यह एक तथ्य है कि लोग प्रायः अत्यन्त बुरे निर्णय करते हैं। यदि लोग पूरा ध्यान देते, उनके पास सम्पूर्ण सूचनाएं होतीं, असीमित संज्ञानात्मक क्षमताएं होती और सम्पूर्ण आत्म-नियंत्रण होता, तो वे ऐसे निर्णय नहीं करते। फिर भी स्वेच्छातंत्रीय पितृसत्तावाद एक अपेक्षतया निर्बल, नरम और अंतर्वेधितारहित प्रकार का पितृसत्तावाद है क्योंकि यह लोगों को बुरे निर्णय लेने से नहीं रोकता है।